*पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर में 5 दिवसीय आचार्य विकास एवं प्रशिक्षण वर्ग का भव्य शुभारंभ*

लखीमपुर खीरी , 0

लखीमपुर खीरी। स्थानीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज (सीबीएसई) में आज 'आचार्य विकास एवं प्रशिक्षण वर्ग' का गरिमामयी प्रारंभ हुआ। यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 5 दिनों तक चलेगा, जिसका विधिवत समापन 29 जून 2026 को होगा। इस प्रशिक्षण वर्ग में विद्यालय के कुल 320 आचार्य एवं आचार्या बहनें प्रतिभाग कर रहे हैं।
 *दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ* 
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, माननीय राजकुमार जी (संस्कृति बोध परियोजना प्रमुख), विद्यालय के प्रबंधक विमल अग्रवाल जी, संकुल प्रमुख योगेन्द्र प्रताप सिंह जी एवं प्रधानाचार्य श्रवण कुमार अवस्थी जी द्वारा माँ शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके पश्चात उपस्थित आचार्यों द्वारा सुमधुर स्वर में माँ शारदे की वंदना की गई। कार्यक्रम के अगले चरण में प्रधानाचार्य श्रवण कुमार अवस्थी जी ने नवागंतुक अतिथियों का औपचारिक परिचय कराया और सभी का स्वागत किया।
 *विद्या भारती के लक्ष्यों और पंचकोषीय शिक्षा पर मुख्य अतिथि का मार्गदर्शन* 
मुख्य अतिथि माननीय राजकुमार जी (संस्कृति बोध परियोजना प्रमुख) ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में आचार्य विकास वर्ग के महत्व एवं इसकी विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षा के भारतीय स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि:
"विद्या भारती का लक्ष्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। इसके लिए हमें 'पंचकोष' (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोष) और 'पंच आयाम' (शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक) के सिद्धांत को समझना होगा। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो छात्र को केवल किताबी ज्ञान न दे, बल्कि उसमें 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (संपूर्ण पृथ्वी ही हमारा परिवार है) की वैश्विक और सनातन भावना का संचार करे।"
उन्होंने आचार्यों की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि एक आदर्श शिक्षक वही है जो निरंतर सीखता रहता है। आचार्यों को अपने भीतर 'स्वाध्याय' (स्वयं अध्ययन) की प्रवृत्ति की वृद्धि करनी चाहिए, ताकि वे समाज और विद्यार्थियों को नित नया ज्ञान दे सकें। इसके साथ ही उन्होंने विद्यालय और घर दोनों स्तरों पर बालक की उचित देख-रेख, स्नेहपूर्ण व्यवहार और उनके मनोवैज्ञानिक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई, ताकि प्रशिक्षण की उपयोगिता को सही मायनों में सार्थकता दी जा सके।
 *अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति* 
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक विमल अग्रवाल जी और संकुल प्रमुख योगेन्द्र प्रताप सिंह जी ने भी आचार्यों का मार्गदर्शन किया और इस 5 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। विद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस वर्ग के माध्यम से शिक्षकों के कौशल विकास, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और सांस्कृतिक मूल्यों के समावेश पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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