*पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक एक मासिय कल्पवास स्थानीय शारदा तट पर*
लखीमपुर खीरी Jan 07, 2026 at 06:40 PM , 112विश्वकांत त्रिपाठी
पलिया कलां लखीमपुर खीरी।श्रीकुल उपासक महाराज गोविंदमाधव ने बताया कि कल्पवास का महत्व हमारे वेदों में वर्णित है,कल्पवास करने से ज्ञात अज्ञात तमाम पापों के क्षय के साथ ही हमारे पित्र गण प्रसन्न होते है और सभी पापों का क्षय करते है।कल्पवास करने से आत्म-शुद्धि, पाप-क्षय और मोक्ष प्राप्ति होती है, जो माघ महीने में पवित्र नदियों (जैसे प्रयागराज के संगम सहित अन्य) के किनारे रहकर एक महीने तक तपस्या, ध्यान, भजन और संयमित जीवन जीने से मिलता है, यह जीवन को सरल, सात्विक और आध्यात्मिक बनाता है, जिससे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।कल्पवास का महत्व:
आत्म-शुद्धि और मन की शांति: इंद्रियों पर संयम और सात्विक जीवन से मन और शरीर शुद्ध होते हैं, ईश्वर से निकटता बढ़ती है.
मोक्ष की प्राप्ति: धार्मिक मान्यता है कि कल्पवास करने वालों को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और ब्रह्म-ज्ञान प्राप्त होता है।
पाप-क्षय: संगम तट तथा नदियों के तट पर कल्पवास से सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को इच्छित फल मिलता है।*दिवसीय को मासि































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