.. सिलवटें है मेरे चेहरे में तो हैरत क्यों है। बज़्म फ़रोगे अदब का 18वां तरही मुशायरा संपन्न हुआ

लखीमपुर खीरी , 86

लखीमपुर खीरी। बज़्म फ़रोगे अदब की जानिब से हर महीने होने वाले तरही मुशायरे की फेहरिस्त में 
18वां मुशायरा संपन्न हुआ। मुशायरे की सदारत बज़्म के सदर आमिर रज़ा पम्मी ने की निज़ामत डॉ एहराज अरमान ने किया।
   खीरी कस्बे के मदरसा सुल्ताने हिंद में आयोजित 18वें तरही मुशायरे का आग़ाज़ नात पाक से करते हुए सैफुल इस्लाम ने कहा- सरवर कहीं या मालिके मौला कहूं तुझे,बागे ख़लील का गुले ज़ेबा कहूं तुझे।
मुशायरे की सदारत कर रहे बज़्म के सदर आमिर रज़ा पम्मी ने कहा - 
दिल मेरा तोड़ दिया कर दिया रुसवा मुझको, 
फिर भी ऐ यार मुझे उनसे मोहब्बत क्यों है।
नफीस वारसी ने पढ़ा-
हर जगह मिलते है तहज़ीबो तमद्दुन वाले,
फिर भी हर समत ज़माने में जहालत क्यों है।
 मुशायरे की निज़ामत कर रहे बज़्म के सिक्रेट्री डॉ एहराज अरमान ने कहा-बस इसी बात से हैरत में पड़ा हूं अरमान,आज दुश्मन को मेरे मुझ पे इनायत क्यों है।
 सैयद सलमान अहमद रिजवी ने कुछ यूं कहा -
छेड़ना तारे आना को तेरी फितरत क्यों है,मैं सारे बज़्म बिखर जाऊं ये चाहत क्यों है।
फ़राज़ अहमद फ़राज़ ने कुछ यूं कहा -
हमने जाना तुझे पाकर तेरी चाहत क्यों है,
दाग़ क्यों दाग़ नहीं दर्दे इबादत क्यों है।
मंसूर मेहवार ने कहा - 
कल के तुम ही थे ख़लीफा ज़रा तारीख पढ़ो,आज हाथों से गई सोचो खिलाफत क्यों है।
उमर हनीफ कुरैशी ने पढ़ा-
एक दिन छोड़ के जाना है यही पर सब कुछ,मालों असबाब की फिर इतनी तुझे चाहत क्यों है।
आसिफ अंसारी ने कहा-
रोज़ होता है नया शख्स तेरे पहलू में, इतनी सस्ती तेरी नज़रों में मुहब्बत क्यों है।
अय्यूब अंसारी ने कहा -
मेरे किरदार पे हर लम्हा ये तोहमत क्यों है, तुझको असलाफ़ से मेरे ही शिकायत क्यों है।
हसन अंसारी ने कहा - 
गैर से खूब मुहब्बत से हैं बाते करते,जिक्र मेरा अगर आए तो आदवत क्यों है।
वहीं इस मौके पर फरवरी माह में होने वाली अगली नशिस्त के लिए तरही मिसरा दिया गया। *वह चल दिए है रूठ के उनको मनाए कौन*
तरही मुशायरा देर रात कामयाबी के साथ मुकम्मल हुआ।

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