शरीर छोड़ने के पश्चात जीव की चार गति_ महात्मा नरसिंह दास

लखीमपुर खीरी , 449

महाकुंभ नगर प्रयागराज/ लखीमपुर।

सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्वावधान में कुंभ मेला सेक्टर 18 प्लॉट नंबर 22 स्थित शिविर में परमपूज्य सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस से तत्त्वज्ञान प्राप्त महात्मा नरसिंह दास ने कहा कि जीव की शरीर छोड़ने के पश्चात चार प्रकार की गतियाँ होती है । जिसमें पहला गति पापी कुकर्मी की है जो शरीर छोड़ने पर नरक में जाता है और अनेक यातनाए भोगता है । दूसरा गति सुकर्मी की है 
जो शरीर छोड़ने पर स्वर्ग में अनेक सुख भोग भोगता है । तीसरा गति ध्यानी या आध्यात्मिक साधक की है
जो आत्मामय ईश्वरमय ब्रह्ममय होकर समाधिस्थ अवस्था में  शरीर छोड़ता है और शिवलोक ब्रह्मलोक में जाता है  और चौथा गति है सत्कर्मी अर्थात भगवद समर्पित शरणागत भक्त सेवक की जो शरीर छोड़ने पर अमरलोक को जाता है और आवागमन की चक्कर से सदा के लिए छुटजाता है ।
उन्होंने बताया कि मनुष्य को हमेशा चौथा गति को प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि पहला दूसरा तीसरा गति होने पर धरती पर आवागमन बना रहता है मोक्ष नहीं मिल पाता है , जबकि चौथा गति मिलने पर मोक्ष प्राप्त होता है अर्थात आवागमन के चक्कर से सदा के लिए जीव छूट जाता है। अत मनुष्य को चाहिए वर्तमान समय के भगवान के अवतार की खोज करके उनके समर्पित शरणागत हो जाये।
सत्संग के पश्चात महात्मा जी ने भजन गाते हुए कहा कि मानव जन्म अनमोल रे, माटी में न रोल रे, अब जो मिला है फिर न मिलेगा , कभी नहीं कभी नहीं कभी नहीं रे।

Related Articles

Comments

Back to Top