घोटालेबाजों का सब काम होता है फटाफट बेसिक शिक्षा विभाग के अजीबो गरीब कारनामे

लखीमपुर खीरी , 180

हरिशंकर मिश्र
लखीमपुर खीरी। बेसिक शिक्षा विभाग मैं फैला भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है, ब्लॉक फूलबेहड़ के प्राथमिक विद्यालय बलिहान में तैनात एक शिक्षिका अपने को बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर की बेटी बताने वाले 20 वर्षों तक घपला घोटाला करके अवकाश प्राप्त कर लिया और आनन फानन में अपने पेंशन भी बनवा ली। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर ने अपना भूखा पेट भर के इस शिक्षिका का पेंशन भी बनवा दी परंतु बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर सब कुछ जानते हुए मूक दर्शक की तरह चुप रहे। जबकि अवकाश प्राप्त शिक्षिका विद्यालय की पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर ईंटों को अपने-आप विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा ग्राम प्रधान व अन्य लोगों के हाथ बेंच दिया इसकी जानकारी बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को थी परंतु उन्होंने इस आध्यापिका की पेंशन भी बना दी। जानकारी के अनुसार ब्लॉक फूलबेहड़ के प्राथमिक विद्यालय बालियान में लगभग 20 वर्षों तक तैनात रही शशि मिश्रा प्रधान अध्यापक के पद पर सेवा के दौरान कभी भी विद्यालय समय से नहीं गई ,नहीं छात्रों को कभी मेहनत से नहीं पढ़ाया, नहीं कोई संस्कार ही सिखाए। हाल यह है कि उनके पढ़ाये हुए छात्र कई बार चोरी में पकड़े गए परंतु रिश्वत अली के दम पर वह छूट गए। गांव के लोग बताते हैं कि विद्यालय की प्रधान अध्यापिका अपने कार्यकाल में छात्रों के एमडीएम में जमकर घोटाला किया है,सरकार से मिलने वाली ग्रांट को फर्जी दिखा घोटाला कर हड़प गई तथा इन्होंने अपने को बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर की बेटी होने की बात कर जमकर फायदा उठाया और खूब घोटाला किया। जब इनको रिटायर होने को 1 साल रह गया तो इन्होंने विद्यालय में पुरानी बिल्डिंग को बगैर परमिशन लिए ही तुड़वा दिया विद्यालय में ईंटे निकले थे उसमें तीन हिस्से लगाए गए एक हिस्सा ग्राम प्रधान ले गए दूसरा हिस्सा विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष को दिया था अध्यक्ष ने पुरानी ईंट को स्कूल की शिक्षामित्र के हाथ बेंच दिया जो तीसरा हिस्सा जो बचा था वह विद्यालय की पूर्व प्रधान अध्यापिका शशि मिश्रा ने बेंच कर अपनी जेब में भर ली। इसकी जानकारी बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को थीं परंतु उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की बल्कि किसी को भनक तक लगने नहीं दी शशि मिश्रा ने अवकाश प्राप्त होने पर अपनी पेंशन भी बनवा ली तथा जो बाकी पैसा था उसको भी प्राप्त कर लिया है अर्थात् भ्रष्ट अफसर शाही के चलते इनको क्लीन चिट दे दी गई। इस विभाग में जो जितना भ्रष्ट होता है उसकी उतनी जल्दी ही पेंशन बेसिक शिक्षा विभाग में बन जाती हैं अफसर अनजान बनकर भ्रष्ट शिक्षकों को बचा दे रहे हैं यहां पर गौरतलब यह भी है की जहां एक ओर तमाम शिक्षकों को वर्षों तक रिटायर होने के बाद पेंशन नहीं मिल पाती है वही भ्रष्ट लोगों की पेंशन तत्काल ही बन जाती है। एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार मुक्त करने में लगी है दूसरी तरफ उनके अफसर उसकी छवि खराब करने के लिए अपने कारिंदों से घपला घोटाला करवाते देखे जा रहे हैं।

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