वाईडीसी में मनाई गई लालबहादुर शास्त्री व महात्मा गांधी की जयंती
लखीमपुर खीरी Oct 02, 2026 at 04:59 PM , 1लखीमपुर खीरी। युवराज दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय लखीमपुर-खीरी में दिनांक 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जन्मजयंती हर्षोल्लास के साथ मनायी गई। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. हेमन्त पाल ने ध्वजारोहण किया। तत्पश्चात दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा गाँधी-शास्त्री जी के जीवन-दर्शन और उनके विचारों की प्रासांगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष चन्द्रा ने कहा कि "गाँधी और शास्त्री जी केवल दो महापुरुषों के नाम हैं बल्कि दो जीवन दर्शन हैं। गाँधी जी ने चिंतन और कर्म में अदभुत समन्वय कर जनमानस में इस आशा को जागृत किया कि दुर्बल से दुर्बल व्यक्ति सत्य एवं अहिंसा के मार्ग पर चलकर मानवता के शिखर पर पहुंच सकता है। वहीं शास्त्री जी ने यह सिद्ध किया कि व्यक्ति पद से नहीं बल्कि चरित्र से महान बनता है। इसीक्रम में राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार ने कहा कि भविष्य के भारत को अगर गढ़ना है तो गांधी और शास्त्री के बिना यह कार्य कदापि संभव नहीं है। आज पूरा विश्व जिस प्रकार से संकट के दौर से गुजर रहा है इसका उत्तर सिर्फ और सिर्फ गांधी और शास्त्री के दर्शन में ही छिपा है। वैज्ञानिक प्रगति की लगभग अंतिम परिणति हम लोग प्राप्त कर चुके हैं। परंतु मानवीय प्रगति की अंतिम परिणति अभी दूर की कौड़ी है। इसलिए गांधी और शास्त्री समीचीन हैं"- वैचारिक दृष्टिकोण से भी और मानवीय दृष्टिकोण से भी। सांस्कृतिक समिति की समन्वयक प्रो. नीलम त्रिवेदी ने कहा कि गांधी जी का रामराज्य का सपना और शास्त्री जी का किसान व जवान के प्रति सम्मान के विचार आज भी प्रासंगिक है। डॉ. सौरभ वर्मा एवं डॉ. रचित कुमार ने गाँधी जी के सर्वोदय और सत्याग्रह सिद्धांत पर अपने विचार व्यक्त किए।संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. हेमन्त पाल ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने अलग अलग समय पर अपने विचारों और नेतृत्व से भारत को नई दिशा दी है। गाँधी जी ने सत्य, अहिंसा व सत्याग्रह के जो सिद्धांत दिये हैं उनको जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। युवा छात्र छात्रायें महापुरुषों के विचारों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।संगोष्ठी के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने गांधी जी व शास्त्री जी के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।






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