ऐतिहासिक देवकली तीर्थ में 17 अगस्त को होगा कालसर्प योग शान्ति महायज्ञ, रजिस्ट्रेशन शुरू

लखीमपुर खीरी , 38

लखीमपुर-खीरी।ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व से जुड़े देवकली तीर्थ स्थल पर आगामी 17 अगस्त 2026, दिन सोमवार (श्रावण शुक्ल पंचमी यानी श्रीनाग पंचमी) को एक विशाल सामूहिक कालसर्प योग शान्ति महायज्ञ का आयोजन होने जा रहा है।श्रीमती चन्द्रकला आश्रम/संस्कृत विद्यापीठ के महन्त प्रमोद जी महाराज ने बताया कि कुंडली में कालसर्प दोष होने से व्यक्ति के विकास के सभी मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। ऐसा जातक अपने दैनिक जीवन में मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं से घिरा रहता है। महन्त जी के अनुसार, कालसर्प योग मुख्य रूप से 12 प्रकार का होता है, जबकि इसके विभिन्न आंशिक रूपों को मिलाकर कुल 3,456 प्रकार के योग बनते हैं। जीवन में अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए इस दोष का निवारण करवाना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
क्यों खास है देवकली तीर्थ
देवकली तीर्थ स्थल राजा जनमेजय के ऐतिहासिक सर्प यज्ञ की पावन धरोहर है। यह देव तीर्थ गोदावरी नदी के पावन जल सहित समस्त पवित्र तीर्थों के जल से प्रतिष्ठित है। साथ ही, यह त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित द्वादश ज्योतिर्लिंगों की आध्यात्मिक ऊर्जा से विभूषित है। यही कारण है कि इस स्थान को कालसर्प योग शांति अनुष्ठान के लिए देश के सर्वोत्तम और सबसे फलदायी स्थानों में से एक माना जाता है।
आश्रम ने की जल्द रजिस्ट्रेशन की अपील
महायज्ञ के भव्य आयोजन को देखते हुए तैयारियाँ जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं। आश्रम प्रशासन ने अपील की है कि जिन भी श्रद्धालुओं की कुंडली में यह दोष है, वे जल्द से जल्द आश्रम कार्यालय से संपर्क कर अपना रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करवा लें, ताकि समय पर पूजा की व्यवस्था की जा सके।

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