कर्मों का फल तुरंत नहीं मिलता- पंडित राजेश दीक्षित

लखीमपुर खीरी , 103

(आलोक मिश्र)

लखीमपुर खीरी। कर्मों का फल तुरंत नहीं मिलता ।यदि झूठ बोलते ही जीभ गल जाती, चोरी करते ही हाथ कट जाते तो मनुष्य दुष्कर्म न करता। ईश्वर के यहां देर हो सकती है पर अंधेर नहीं है।जो कर्म छोड़कर भाग्य पर निर्भर रहता है उसकी दुर्दशा होती है। इसीलिए गीता में निष्काम कर्म की महत्ता प्रतिपादित की गई है।जो भगवान को समर्पित कर निष्काम कर्म करते हैं,वे कमल के पत्ते की भांति निर्लिप्त रहते हैं।जो जैसा कर्म करेगा वह वैसा ही फल पायेगा।शुभ,अशुभ कर्म के अनुसार ही ईश्वर फल देता है। सद्बुद्धि की प्राप्ति से ही मनुष्य काम,क्रोध,लोभ, मोह, अहंकार से बच सकता है।यही सब मनुष्य के महान शत्रु हैं और इनके वशीभूत होकर मनुष्य दुर्बुद्धि ग्रस्त होकर नीच काम करता है। उक्त विचार हैं श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के संस्थापक अध्यक्ष यज्ञाचार्य पं राजेश दीक्षित के जिन्होंने ग्राम कैमासुर सिद्ध बाबा स्थान पर गायत्री दीप महायज्ञ संपन्न कराते हुए कहे। पांच सौ इक्यावन दीपों को प्रज्वलित कर दीप महायज्ञ के साथ महायज्ञ का समापन किया गया।महायज्ञ समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया।

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