सच्ची भक्ति समर्पण से - पंडित राजेश दीक्षित
लखीमपुर खीरी Jan 01, 2026 at 05:05 PM , 281(सुनील शर्मा)
लखीमपुर खीरी। भक्ति समर्पण का नाम है। सच्चा भक्त कभी छल कपट का व्यवहार नहीं कर सकता। प्रभु केवल प्रेम के भूखे हैं।जब तक हृदय में काम,क्रोध,लोभ, मोह, अहंकार का बसेरा है तब तक वे प्रभु मन मंदिर में नहीं आ सकते। प्रेम गली अति सांकरी तामें दो न समाय। समर्पण किया था हनुमान ने वे भगवान राम से अधिक पूज्य हो गये। समर्पण किया था अर्जुन ने बस फिर क्या था, स्वयं भगवान उनके सारथि बन गये। समर्पण किया था निर्जीव बांस की बांसुरी ने जो कृष्ण के ही अधरामृत का निरंतर पान करती रही। गोपियों को भी बांसुरी से ईर्ष्या होती थी। सच्चा समर्पण किया था मीरा ने भगवान उसके साथ नाचते गाते थे।उसका विष का प्याला भी अमृत हो गया,सर्प पिटारी फूलों की माला बन गई।जो भगवान को समर्पण कर कार्य करता है भगवान हर समय उसका सहयोग करते रहते हैं। उक्त विचार हैं श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के संस्थापक अध्यक्ष यज्ञाचार्य पं राजेश दीक्षित के जिन्होंने ग्राम कैमासुर सिद्ध बाबा स्थान पर पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ के छठे दिन यज्ञ कराते हुए कहे। महायज्ञ में कई लोगों ने नशा छोड़ने का संकल्प लिया। महायज्ञ में गीत संगीत प्रस्तुत किया विष्णु कुमार शर्मा व अमित जी ने।यज्ञ में सैकड़ों माताओं बहनों व परिजनों ने राष्ट्र कल्याण हेतु आहुतियां देकर अपने जीवन को धन्य किया।































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