सप्तदिवसीय पञ्च कुंडीय महायज्ञ का शुभारंभ

लखीमपुर खीरी , 151

(सुनील शर्मा)

लखीमपुर खीरी।कलश में तेंइतीस कोटि देवताओं का निवास होता है।कलश को संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है। बड़ा सौभाग्य होता है जिन माताओं बहनों को अपने सिर पर कलश धारण करने का अवसर मिलता है। सनातन धर्म में कोई भी पूजा पाठ विना कलश स्थापना किए नहीं होता है। कलश का हमारी भारतीय संस्कृति में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है।कलश हमारे जीवन में सुख शांति समृद्धि प्रदान करता है। सौभाग्यवती माताओं बहनों का सुहाग अटल होता है। अतः कलश पूजन बहुत ही महत्वपूर्ण है। उक्त विचार हैं श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के संस्थापक अध्यक्ष यज्ञाचार्य पं राजेश दीक्षित जी के जिन्होंने ग्राम कैमासुर के सिद्ध बाबा स्थान पर सात दिवसीय पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर कलश शोभायात्रा में पूजन कराते हुए कहे। उक्त महायज्ञ पूज्य गुरुदेव पं श्री राम शर्मा आचार्य व वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म संरक्षण व श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के तत्वावधान में संपन्न होगा। भव्य कलश शोभायात्रा सैकड़ों माताओं बहनों ने अपने सिर पर कलश रखकर निकाली। कलश शोभायात्रा देवकली तीर्थ से पवित्र जल भरकर सिद्ध बाबा स्थान पर पांच कुंडीय यज्ञशाला में स्थापित किया गया। आरती व प्रसाद वितरण के साथ कलश शोभायात्रा का समापन किया गया।

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