हर्षोल्लास के साथ मनाई गई गुरुनानक जयंती एवं देवदीपावली कार्यक्रम शिशुवाटिका

लखीमपुर खीरी , 147

लखीमपुर खीरी।विद्या भारती सनातन धर्म सरस्वती शिशु वाटिका लखीमपुर खीरी में आज विद्यालय की संचालिका श्रीमती हीरा सिंह ने मां सरस्वती  एवं गुरुनानक देवजी के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं पुष्पार्चन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ एवं कार्तिक पूर्णिमा ( देव दीपावली) हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती रमा मिश्रा  जी ने गुरुनानक जयंती पर प्रकाश डालते हुए बताया कि  गुरु नानक जयंती एक महत्वपूर्ण सिख त्योहार है, जो गुरु नानक देव जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है, जो गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को याद करने और उनके आदर्शों को अपनाने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन प्रभात फेरी गुरु नानक देव जी के चित्र के साथ शोभा यात्रा निकालती है। गुरुद्वारों और घरों में भजन और कीर्तन होते है। लंगर का भी आयोजन किया जाता है ।गुरुद्वारों में सामुदायिक भोजन परोसना। दान और सेवा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए दान और सेवा करना।
गुरु नानक जयंती पर लोग गुरुद्वारों में एकत्रित होकर गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को याद करते हैं। यह दिन एकता, समानता और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को अपनाने का अवसर प्रदान करता है। विद्यालय की संचालिका श्रीमती हीरा सिंह ने कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली के पर प्रकाश डालते हुए बताया कि देवदीपावली के साथ-साथ गुरु नानक जयंती का उत्सव और भी विशेष हो जाता है, क्योंकि दोनों ही प्रकाश और ज्ञान के प्रतीक हैं। इस दिन लोग अपने घरों और गुरुद्वारों को दीयों से सजाते हैं और भगवान की पूजा करते हैं।
इस प्रकार, गुरु नानक जयंती और देवदीपावली का कार्यक्रम एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है, जो लोगों को एकजुट करने और उन्हें गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के प्रति जागरूक करने का अवसर प्रदान करता है।देव दीपावली: एक आध्यात्मिक उत्सव
देव दीपावली एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन देवताओं के जगने और स्वर्ग से पृथ्वी पर आने का उत्सव मनाया जाता है। देव दीपावली का महत्व देवताओं का आगमन इस दिन देवता स्वर्ग से पृथ्वी पर आते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।प्रकाश का पर्व देव दीपावली प्रकाश का पर्व है, जिसमें लोग अपने घरों और मंदिरों को दीयों से सजाते हैं।आध्यात्मिक महत्व यह पर्व आत्मिक ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार का प्रतीक है। देव दीपावली की परंपराएं
दीप जलाना लोग अपने घरों और मंदिरों में दीप जलाते हैं, जो अंधकार को दूर करने और प्रकाश की प्राप्ति का प्रतीक है।
पूजा-अर्चना देव दीपावली पर भगवान शिव, भगवान विष्णु और अन्य देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है।
दान और पुण्य इस दिन दान और पुण्य करने का विशेष महत्व है, जिससे पुण्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
देव दीपावली के लाभआत्मिक शांति  देव दीपावली का पर्व आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।
सकारात्मक ऊर्जा यह पर्व सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक है, जो जीवन में सुख और समृद्धि लाता है।
सामाजिक एकता: देव दीपावली का पर्व सामाजिक एकता और सौहार्द को बढ़ावा देता है।देव दीपावली एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो प्रकाश, ज्ञान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से हम अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही विद्यालय की दो आचार्य बहन श्रीमती रजनी कपूर एवं श्रीमती ज्योति मिश्रा को शिक्षण शुल्क की तृतीय किश्त संपूर्ण होने पर विद्यालय की ओर से पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम के साथ हुआ। सभी शिक्षिकाएं बहनें भईया बहन उपस्थित रहे।।

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