श्री राधा कृष्ण मंदिर दुधवा के जीणोद्धार व सौंदर्यीकरण हेतु ज्ञापन एसडीएम को सौंपा

लखीमपुर खीरी , 3

(विश्वकांत त्रिपाठी)

पलियाकलां- खीरी। एसडीएम को दिए ज्ञापन श्री राधाकृष्ण प्राचीन मन्दिर स्थित दुधवा को सौंदर्याकरण व जीर्णोद्धार कराये जाने को भक्तों ने ज्ञापन दिया।
     दुधवा के श्रीराधाकृष्ण मन्दिर के सौंदर्य करण को श्रद्धालु मंच ने एसडीएम पलिया के माध्यम से उच्चाधिकारियों को 05 सूत्रीय मांग की गई है-01-अवगत कराना है कि लगभग 100 वर्ष से पुराना श्री राधाकृष्ण प्राचीन मन्दिर, स्थित दुधवा रेलवे स्टेशन के पीछे जो अंग्रेजों के शासन काल (1942-43)वर्ष से स्थापित है जिसमें थारू अनुसूचित जनजाति व अन्य लोगों की आस्था से जुड़ा मन्दिर है जो लगभग 100 वर्ष पुराना है जिसका सौंदर्यकरण व जीर्णोद्धार तत्काल प्रभाव से कराया जाना आवश्यक है।
02-जब इस मन्दिर का निर्माण कराया गया था तब दुधवा रेलवे स्टेशन जंक्शन हुआ करता था जहां से भारी मात्रा में गौरीफंटा के व्यापारी व नेपाली नागरिक व थारू जनजाति के लोग तथा अधिकारीगणों का आवागमन होता था तब से यह मन्दिर स्थापित है जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जनप्रतिनिधि व तमाम सरकारी महकमों ने अनुदान देकर इस मन्दिर का निमार्ण कराया था इसलिए श्रद्धालुओं को बिना रोक-टोक के आवागमन करने दिया जाय, श्रद्धालुओं के आने-जाने पर प्रतिबंध न लगाया जाये।
03- प्राचीन मन्दिर को कुछ निहीत स्वार्थी तत्व बेशकीमती मूर्ति को व उसमें रखे सामान को उठा ले जाना चाहते हैं इसका उन्हें कोई अधिकार नहीं है। मिली जानकारी के अनुसार मिशनरी अपने धर्म का प्रभाव दिखाने व धर्म परिवर्तन कराने के लिए षड़यंत्र कर धीरे-धीरे प्राचीन मन्दिरों को हटाने का प्रयास कर रहे हैं। धर्म परिवर्तन के जीते जागते उदाहरण सरकारी अभिलेखों में मौजूद हैं।
04-मन्दिर पर पूजन-अर्चन में कोई रोक-टोक न लगाई जाय, मन्दिर में पूजा, अर्चना भजन कीर्तन प्रत्येक व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है। प्रत्येक सनातन प्रेमी व्यक्ति को उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
05-सरकार की योजनान्तर्गत उक्त मन्दिर का अपेक्षित विकास कराया जाय उसमें स्थापित प्राचीन मूर्ति व मन्दिर की सम्पत्ति को सुरक्षित कराया जाय जिससे अराजक तत्व मन्दिर की बेशकीमती प्राचीन मूर्ति व मन्दिर की धरोहर को क्षति न पहुंचा सकें।
श्रद्धालुओं द्वारा उक्त 05 सूत्रीय मांगों को शीघ्र से शीघ्र पूरा करने की मांग की गई है जिससे उक्त प्राचीन मन्दिर में पूजा-अर्चना आदि कार्य सुचारू रूप से होता रहे।

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