विजया दशमी के अवसर पर नव निर्मित मंदिर में भगवद विग्रह स्थापना

लखीमपुर खीरी , 213

अद्भुत सत्संग, भजन-कीर्तन का कार्यक्रम

सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार धर्म क्षेत्र में- महात्मा दशरथ जी

(सुनील शर्मा)
                                     
मझवारा लखीमपुर। स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में विजया दशमी  के अवसर पर परमभाव धाम आश्रम, मझवारा में 28 से 30 सितंबर तक सत्संग कार्यक्रम तत्पश्चात 1 अक्टूबर को नव निर्मित मंदिर में चतुर्युगीन पूर्णावतार भगवान श्री विष्णु – राम – कृष्ण – सदानन्द जी का विग्रह स्थापना किया जाएगा । विजया दशमी विशेष कार्यक्रम 2 अक्टूबर को होगा, जिसमें दीप प्रज्वलन, झंडारोहण एवं भंडारा किया जाएगा ।
               संस्था के महात्मा दशरथ जी ने कहा आज अगर सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार किसी क्षेत्र में है तो वह धर्म क्षेत्र में ही है । उन्होंने कहा - भगवान् एक था एक है एक ही रहने वाला परम सत्ता शक्ति है जो दो भी नहीं होता परन्तु आज हर महत्वाकांक्षी गुरु जी लोग सद्गुरु, जगतगुरु, श्री श्री श्री 108 श्री अनंत श्री आदि आदि पदवी ले लेकर अपने शिष्यों में भगवान् बन रहे हैं और उनके धन और धर्म भाव का शोषण कर रहे हैं , जब की ये गुरु जी लोग शरीर में रहने वाले चेतन जीव को भी नहीं जानते और न परमात्मा को ही जानते हैं , नाजानकर आत्मा को ही जीव और आत्मा को ही परमात्मा घोषित करने कराने में लगे हैं, 
             महात्मा दशरथ जी ने कहा, भगवान विष्णु-राम-कृष्णजी ने जिस ‘तत्त्वज्ञान’ को अपने समर्पित-शरणागत भक्त-सेवकों को देकर परमेश्वर के जिस विराटरूप का साक्षात् दर्शन कराया था, आज सन्त ज्ञानेश्वर जी ने अपने भक्त-सेवकों को उसी तत्त्वज्ञान को ही देकर जीव-आत्मा-परमात्मा का आमने-सामने बातचीत के साथ साक्षात दर्शन कराया। महात्मा जी ने आगे कहा की उस तत्त्वज्ञान में यह स्पष्ट दिखलाई दिया की श्री विष्णु-राम-कृष्ण के शरीर में अवतरित हो कर जिस परमतत्त्वम ने कार्य किया था , आज सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस के शरीर में अवतरित होकर  उसी परमतत्त्वम ने धर्म संस्थापन का कार्य किया है ।
            महात्मा जी ने कहा कि इस संस्था का एकमात्र उद्देश्य धर्म-धर्मात्मा-धरती की रक्षा ही है । असत्य-अधर्म-अन्याय-अनीति को समूल समाप्त कर सत्य-धर्म-न्याय-नीति को समाज में लागू करने हेतु सन्त ज्ञानेश्वर जी के सकल शिष्य समाज संकल्पित एवं समर्पित हैं । इसी क्रम में जनसमाज को भगवद भक्तिसेवा से जोड़ने हेतु संस्था के जगह जगह के आश्रमों में पूर्णावतार मंदिर निर्माण कर भगवद विग्रह स्थापित किया जा रहा है।

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