*अब तक स्टेमी केयर सेंटर ने बचाई 46 हृदयाघात से पीड़ित मरीजों की जान- सीएमओ*
लखीमपुर खीरी Sep 27, 2025 at 05:55 PM , 153*विश्व हृदय दिवस पर विशेष*
लखीमपुर खीरी। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के चलते हृदयाघात (हार्ट अटैक) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं में भी इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में समय पर उपचार ही मरीज की जान बचाने का सबसे बड़ा सहारा है।
जनपद में बढ़ते मामलों को देखते हुए शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल सहित पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टेमी केयर सेंटर की शुरुआत की गई है। अप्रैल 2025 से अब तक यहां 46 मरीजों की जान बचाई जा चुकी है, जो स्वास्थ्य विभाग की बड़ी उपलब्धि है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि हार्ट अटैक के दौरान हर मिनट कीमती होता है। समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा बढ़ जाता है। स्टेमी सेंटर में मरीजों को तत्काल जांच, ईसीजी और जरूरत पड़ने पर करीब 20 हजार रुपए कीमत का टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन उपलब्ध कराया जाता है, जो खून के थक्के को घोलकर जान बचाने में बेहद कारगर है। अभी जिला चिकित्सालय मोतीपुर ओयल सहित गोला, मोहम्मदी, मितौली, पलिया, धौरहरा में स्टेमी सेंटर की शुरुआत की गई है।
*हृदयाघात के लक्षण*
स्टेमी सेंटर के नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ प्रमोद रावत ने बताया कि हृदयाघात के लक्षणों को पहचाना बेहद जरूरी होता है यह किसी की जान बचाने के लिए बेहद जरूरी है। सीने में तेज दर्द, सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक पसीना, चक्कर आना और दर्द का कंधे या जबड़े तक फैलना आदि शामिल हैं।
*सावधानियां*
एनसीडी नोडल अधिकारी/डिप्टी सीएमओ डॉ अमित सिंह ने बताया कि तुरंत अस्पताल या स्टेमी सेंटर पहुंचें। मरीज को आराम दें और अकेला न छोड़ें। "गोल्डन ऑवर" यानी पहले एक घंटे में उपचार बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और नशे से दूरी बनाकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।






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