कस्बा खीरी का प्राचीन कब्रिस्तान बदहाल
लखीमपुर खीरी Sep 27, 2025 at 05:52 PM , 155टूटी बाउंड्री, घुस रहे आवारा पशु, मुस्लिम समाज का ग़ुस्सा उबाल पर; ईओ साहब कब जागेंगे?
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खीरी टाउन -खीरी
करीब सत्तर हज़ार की आबादी वाले कस्बा खीरी का ऐतिहासिक पक्का ताल स्थित मुस्लिम समाज का प्राचीन कब्रिस्तान इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। नगर पंचायत प्रशासन की बेरुख़ी और लापरवाही का आलम यह है कि इस पवित्र जगह की हालत आज बेहद दयनीय हो चुकी है।
अखिलेश यादव सरकार के दौर में अधिकांश कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवॉल बनवाई गई थी, ताकि आवारा पशुओं की घुसपैठ रोकी जा सके। लेकिन आज हालात ये हैं कि पक्का लाल कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल पूरी तरह से धराशायी हो चुकी है।
टूटी बाउंड्री, धस रही क़ब्रें
आवारा पशु बिना रोक-टोक कब्रिस्तान में घुसते हैं और उनकी चहल-कदमी से कई पुरानी क़ब्रें धंस चुकी हैं। झाड़ियों की वजह से कब्रें तक साफ़ दिखाई नहीं देतीं और कई क़ब्रों का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। ऐसे में दफ़नाने आने वाले परिजनों को भारी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है।
नालियों और लाइटों पर कमीशन, कब्रिस्तान पर चुप्पी
कस्बे के मुस्लिम समाज का कहना है कि नगर पंचायत प्रशासन का ध्यान केवल नालियों, सड़कों और स्ट्रीट लाइटों पर है, क्योंकि वहीं से कमीशनखोरी का खेल चलता है। लेकिन इंसान की आख़िरी मंज़िल – उसकी क़ब्र – शायद ईओ साहब की नज़र से ओझल है।
मुस्लिम समाज में ग़ुस्सा
कस्बे के मुस्लिम समाज में इस लापरवाही को लेकर गहरा ग़ुस्सा है। लोगों का कहना है कि "यह कब्रिस्तान सिर्फ़ ज़मीन का टुकड़ा नहीं बल्कि हमारे बुज़ुर्गों की आख़िरी आरामगाह है। यहाँ की बदहाली प्रशासन की असंवेदनशीलता को उजागर करती है।"
लोगों का सवाल साफ़ है –
"क्या गुलाबी नोटों की चमक ने नगर पंचायत प्रशासन की आंखों पर पर्दा डाल दिया है? कब तक इंसान की आख़िरी मंज़िल को यूँ ही रौंदा जाता रहेगा?"
कस्बा खीरी का यह प्राचीन कब्रिस्तान तुंरत मरम्मत और साफ़-सफ़ाई की माँग कर रहा है। मुस्लिम समाज की नाराज़गी अब ग़ुस्से में बदल रही है। ईओ साहब, अब वक्त है कि आप कमीशन की अंधी दौड़ छोड़कर इस कब्रिस्तान की ओर ध्यान दें – वरना आने वाले दिनों में यह ग़ुस्सा सड़कों पर भी उतर सकता है।






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