तैयारियां पूरी, आज शुरू होगा छोटी काशी कवयित्री महाकुम्भ
लखीमपुर खीरी Sep 11, 2025 at 06:35 PM , 213कपिलश फाउंडेशन के तत्वावधान में गोला गोकर्णनाथ के रॉयल में आज दिनांक 12 सितंबर दिन शुक्रवार सुबह 10 बजे को छोटी काशी कवयित्री महाकुम्भ का आगाज़ होने जा रहा है जो कि 14 सितंबर शाम तक लगातार 51 घंटे चलेगा और एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करेगा।
कपिलश फाउंडेशन अध्यक्ष शिप्रा खरे ने बताया कि इस कार्यक्रम में पूरे देश से 150 से अधिक कवयित्रियां सम्मिलित हो रही हैं। जिसमें प्रथम दिवस में पहली कवयित्री के रूप में राष्ट्रीय कवयित्री लखनऊ से सुफलता त्रिपाठी, बिहार से शेफालिका झा, लखनऊ से दिव्या मीरा, रेखा बोरा, मीनाक्षी शुक्ला, नोएडा से मनीषा जोशी, लखनऊ से डॉ विमलेश गंगवार, डॉ कुसुम चौधरी, मशहूर शायरा इशरत सुल्ताना, संदीपिका दीक्षित, बिजनौर से रचना शास्त्री, सीतापुर से सीमा मिश्रा, जौनपुर से डॉ ऐश्वर्या सिन्हा, गाजियाबाद से स्वाति गोयल, खुर्जा से लक्ष्मी कनोडिया, कासगंज से गुंजन अग्रवाल, उत्तराखंड से रोशनी कुंवर, सावित्री जावड़ा, अंजलि डुडेज़ा, भोपाल से सुमन श्री मिश्रा सहित 70 कवयित्रियां कविता पाठ करेंगी।
इस कार्यक्रम की निगरानी हेतु द बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, दुबई के जज समीर सिंह भी शुक्रवार सुबह गोला गोकर्णनाथ पहुंच रहे हैं। जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्यक्रम द बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के नियमों के अधीन हो रहा है कि नहीं।
कपिलश प्रवक्ता एवं संयोजक श्रीकान्त तिवारी कान्त ने बताया कि अभी तक ऐसा आयोजन दुनिया में कहीं नहीं हुआ है जो केवल कवयित्रियों को समर्पित हो और 24 घंटे से अधिक लगातार चला हो।
जैसा कि विदित है पिछले वर्ष भी कपिलश फाउंडेशन द्वारा लगातार 154 घंटे के छोटी काशी काव्य महाकुंभ का आयोजन किया गया था जिसमें देश भर से 678 कवियों ने काव्यपाठ किया था। कपिलश फाउंडेशन के संयोजक एवं कार्यक्रम समन्वयक यतीश शुक्ला जो स्वयं लगातार 148 घंटे पढ़ाने, 128 घंटे पढ़ने और 106 घंटे भाषण समेत पांच विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं, उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्वयंसेवकों की 6 टीमों का गठन किया गया है जो कवयित्रियों के पंजीकरण, ठहराव, भोजन, आवागमन, एवं छोटी काशी भ्रमण में सहायता करेंगी। कपिलश संरक्षक पूर्व विधायक विनय तिवारी ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य न सिर्फ विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना है वरन महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें एक बड़ा मंच प्रदान करने के साथ साथ छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ का प्रचार प्रसार भी पूरे भारत में करना हैं।






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