एक शिकारी ने तमगा हासिल करने के उद्देश्य से दुधवा जंगल से रेललाइन हटाने का रचा कुचक्र, -- 2
लखीमपुर खीरी Sep 11, 2025 at 06:40 PM , 218"जब एक देश एक विधान तो फिर यह दोयम नीति लखीमपुर के साथ ही क्यों ?"
(विश्वकांत त्रिपाठी/केके शुक्ला )
लखीमपुर खीरी।पलिया क्षेत्र के कथित वन्य जीव प्रेमी ने तमगा हासिल करने के उद्देश्य से डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क से गठ जोड़ के बाद से ही रेल और थारू गांवों पर संकट के बादल मंडराने लगे थे, बिल्ली अर्जुन सिंह और डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नहीं चाहते थे कि दुधवा जंगल में ट्रेन चले और थारू गांव रहे, उसी के तहत सबसे पहले सुरमा गांव उजाड़ने,और जंगल से गुजर रही सड़क बंद कराने का सरकारी आदेश गुप-चुप ढंग से कराया लिया गया, वहीं नब्बे के दसक मे इससे पहले दुधवा चंदनचौकी और दुधवा गौरीफंटा रेललाइन हटाई जा चुकी थी।
रेलवे लाइन तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व से भी निकली है, रेलवे लाइन तो जिम कॉर्बेट पार्क से भी निकली है जो ट्रेन रामनगर से आगरा फोर्ट जाती है, रेलवे लाइन तो राजाजी पार्क से भी निकली है जो लाइन देहरादून से हरिद्वार आती है बल्कि देश में तमाम वन क्षेत्रों से होकर रेलवे लाइन गुजरती है तो फिर सवा सौ वर्षों चली आ रही रेल लाइन पर अमान परिवर्तन क्यों नहीं कराया जा रहा है।
गोरखपुर से आये एक शिकारी की बात सर्वोपरि हो गई जो देश आजाद होने के बाद जिसकी कुदृष्टि यहां के हरे-भरे जंगल और जमीन पर पड़ी पहले उसने जंगली जीवों का जमकर शिकार किया जब मन भर गया और शिकार करने की क्षमता नहीं रही तब वह वन्य जीव प्रेमी और वन संरक्षण का चोला पहन कर वन्य जीव प्रेमी बन यहां के मूल निवासी "थारू" जिनका जन्म से जंगल और जंगली जीव जंतुओं तथा जंगली की जमीनों पर अधिकार था उनके गांव को जंगल एरिया से बाहर निकलवाने और दुधवा नेशनल पार्क के माध्यम से निकली सड़कों को बन्द कराने की ठान ली।
इसके पीछे उसका एकमात्र मनसा था कि ऐन केन प्रकारेण वन विभाग और सरकार की चापलूसी कर तमगा हासिल कर लिया जाए और थारू समाज के गांवों तथा आबादी को दुधवा से बाहर निकल दिया जाये और एक छत्र दुधवा मेरी शिकार गाह बनी रहे ? केवल इतना ही नहीं उसने सरकार सहित वनाधिकारियों को भी बूटी पिलाकर अपने फेवर में कर लिया था।
"जब एक देश एक विधान पर बात हो रही है तो फिर यह दोयम नीति लखीमपुर वालो के साथ ही क्यों लागू हो रही है ?"
क्षेत्रीय नागरिक, व्यापारी, किसान, राजनीतिक दल,तथा आम आदमी नानपारा पलिया-भीरा रेल खंड पर अमान परिवर्तन कराने, तथा वर्ष 1990-91 में दुधवा से गौरीफंटा तथा दुधवा से चंदन चौकी रेल ट्रैक पर ट्वाय ट्रेन चलाने की मांग को लेकर काफी विचार विमर्श करने के बाद अलग अलग स्टेशन क्षेत्र (जगहों) के व्यापारी गण एवं समाजसेवी संगठनों के बीच वार्ता के दौरान हुई सहमति मे बड़ी संख्या मे विरोध प्रदर्शन करते हुए रेल मंत्री को सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम पलिया को प्रेषित करने के साथ ही रेल विभाग को अल्टीमेटम दिया कि दस दिनों के अंतराल मे अगर कोई सुनवाई नही होती है तो शक्ति प्रदर्शन, धरना प्रदर्शन, चक्का जाम, मार्केट बंदी, जैसी मुहीम को अंजाम दिया जायेगा वही क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक संगठनों ने एकजुट होकर पालिया से बेलरायां के बीच पड़ने वाली सभी रेलवे स्टेशनों पर 21 सितंबर से धरना प्रदर्शन तथा क्रमिक अनशन की व्यवस्था भी क्षेत्रीय नागरिक कर रहे हैं।
इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह भारत सरकार और रेल मंत्रालय की होगी समय रहते भारत सरकार मैलानी नानपारा रेलखंड पर अमान परिवर्तन कर बड़े लाइन की तेल चलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।






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