“साधना से नहीं मिलता परमात्मा परमेश्वर-महात्मा शिवानन्द जी”
लखीमपुर खीरी Jun 14, 2025 at 11:56 AM , 1006लखीमपुर-खीरी। सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में जनता उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण, महुआरी, पथरदेवा में धर्म -धर्मात्मा-धरती रक्षार्थ चल रहे सत्संग कार्यक्रम में बोलते हुए महात्मा शिवानन्द ने कहा, परमात्मा परमेश्वर परमब्रह्म या खुदा गॉड भगवान न तो जप तप नेम व्रत होम यज्ञ तीर्थ स्नान अथवा त्याग सन्यास से मिलता है और न ही योग -साधना आदि के सहारे से ही प्राप्त होता है । परमात्मा की प्राप्ति तत्त्वज्ञान से होता है ।
उन्होंने कहा कि जीव को ही आत्मा या ईश्वर और आत्मा या ईश्वर को ही परमात्मा या परमेश्वर मानने वाले लोग साधना से परमात्मा परमेश्वर या खुदा-गॉड-भगवान को प्राप्त कर लेने की घोषणा करते हैं, जबकि जीव एवं ईश्वर(आत्मा)और परमेश्वर (परमात्मा) तीनो हर मामले में अलग अलग हैं। वास्तव में योग-साधना या अध्यात्म से हम जिसे प्राप्त करते हैं, वह परमात्मा-परमेश्वर नहीं बल्कि आत्मा-ईश्वर है और आत्मा-ईश्वर परमात्मा-परमेश्वर का अंश है। उस आत्मा या ईश्वर का मायावी दोष -गुण से युक्त होने को ही जीव कहते हैं। तीनों ही एक दूसरे से हर मामले में सर्वथा भिन्न-भिन्न होते हैं, जिन्हें तत्त्वज्ञान रूप भगवद् ज्ञान के अंतर्गत यथावत साक्षात पृथक पृथक देखा जाता है तथा बातचीत करते हुए उनका परिचय-पहचान भी प्राप्त किया जाता है । गीता वाले विराट रूप को भी सामने ही देखने का सुअवसर तत्त्वज्ञान के अंतर्गत ही हर भगवद् समर्पित-शरणागत जिज्ञासु को प्राप्त होता है। महात्मा जी ने बताया कि वर्तमान मे सन्त ज्ञानेश्वर जी ने अपने हजारों-हजार शिष्यों को जीव ईश्वर परमेश्वर का साक्षात् दर्शन कराया है।






_page-0001.jpg)
























Comments