निर्माणों के युग में चरित्र निर्माण पर भी ध्यान दे समाज : राजेश दीक्षित

लखीमपुर खीरी , 164

लखीमपुर खीरी। देश में विकास और तकनीकी प्रगति के इस दौर में जहाँ भौतिक उपलब्धियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। यह विचार समाजसेवी राजेश दीक्षित ने एक स्थानीय कार्यक्रम में व्यक्त किए।राजेश दीक्षित ने कहा, “निर्माणों के पावन युग में हमें चरित्र निर्माण को नहीं भूलना चाहिए। स्वार्थ साधना की आंधी में वसुधा का कल्याण न भूले।” उन्होंने कहा कि आज का युग संघर्षों से भरा है, लेकिन मझधार में डूबना किसी भी साहसी समाज को स्वीकार नहीं होना चाहिए।दीक्षित ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली और विज्ञान के विकास पर भी टिप्पणी करते हुए कहा, “ज्ञान, शील और आदर्श के बिना कोई भी शिक्षा पूर्ण नहीं हो सकती। यदि शिक्षा में नैतिक आधार नहीं है तो वह केवल स्वरहीन संगीत बनकर रह जाती है। सृजनहीन विज्ञान भी तब तक व्यर्थ है जब तक उसमें मानवता और उपकार की भावना न हो।”उन्होंने चेताया कि केवल भौतिक उपलब्धियों से जीवन का समग्र विकास संभव नहीं है। आविष्कारों की कृतियाँ तभी सार्थक हैं जब उनमें प्रेम और संवेदना का समावेश हो।कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने कहा, “कीर्ति और गौरव तभी टिके रह सकते हैं जब हम संस्कृति और नैतिकता का सम्मान करें। इसलिए इस निर्माणशील युग में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चरित्र निर्माण ही सच्ची प्रगति की नींव है।”उनका यह संदेश श्रोताओं के बीच गहरी छाप छोड़ गया और सभागार तालियों से गूंज उठा।

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