धर्म धर्मात्मा धरती रक्षार्थ अद्भुत सत्संग एवं भजन-कीर्तन आडंबर ढोंग पाखंड मिटाना ही उद्देश्य
लखीमपुर खीरी Jun 08, 2025 at 02:10 PM , 837पथरदेवा, देवरिया ।
सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में 8 जून से 14 जून तक जनता उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण, महुआरी, पथरदेवा में धर्म -धर्मात्मा-धरती रक्षार्थ भजन - कीर्तन एवं सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें जिज्ञासु जनों को सत्य-धर्म संस्थापनार्थ धर्म-धर्मात्मा-धरती रक्षार्थ भगवान श्री विष्णु जी-श्री राम जी-श्री कृष्ण जी-सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस जी के दुर्लभ तत्त्वज्ञान बताया एवं जनाया जायेगा ।
संस्था के प्रमुख प्रतिनिधि कमल जी ने कहा इस कार्यक्रम का उद्वेश्य जनमानस को धर्म के नाम पर फैले आडम्बर-ढोंग-पाखंड से बचाना है। उन्होंने कहा - भगवान् एक था एक है एक ही रहने वाला परम सत्ता शक्ति है जो दो भी नहीं होता परन्तु आज हर महत्वाकांक्षी गुरु जी लोग सद्गुरु, जगतगुरु, श्री श्री श्री 108 श्री अनंत श्री आदि आदि पदवी ले लेकर अपने शिष्यों में भगवान् बन रहे हैं और उनके धन और धर्म भाव का दोहन - शोषण कर रहे हैं , जब की ये गुरु जी लोग शरीर में रहने वाले चेतन जीव को भी नहीं जानते और न परमात्मा को ही जानते हैं , नाजानकारी में आत्मा को ही जीव और आत्मा को ही परमात्मा घोषित करने कराने में लगे हैं ।
पिपरा धाम आश्रम के महात्मा दशरथ जी ने कहा, भगवान श्री विष्णु-राम-कृष्णजी ने जिस ‘तत्त्वज्ञान’ को अपने समर्पित-शरणागत भक्त-सेवकों को देकर परमेश्वर के जिस विराटरूप का साक्षात् दर्शन कराया ठीक उसी तरह वर्तमान में सन्त ज्ञानेश्वर जी ने अपने भक्त-सेवकों को उसी तत्त्वज्ञान को ही देकर जीव-आत्मा-परमात्मा का आमने-सामने बातचित के साथ साक्षात दर्शन कराया है । महात्मा जी ने आगे कहा की उस तत्त्वज्ञान में यह स्पष्ट दिखलाई दिया की श्री विष्णु-राम-कृष्ण के शरीर में अवतरित हो कर जिस परमतत्त्वम ने कार्य किया था , आज सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस के शरीर में अवतरित होकर उसी परमतत्त्वम ने धर्म संस्थापन का कार्य किया है ।
महात्मा जी ने कहा कि इस संस्था का एकमात्र उद्देश्य धर्म-धर्मात्मा-धरती की रक्षा ही है । असत्य-अधर्म-अन्याय-अनीति को समूल समाप्त कर सत्य-धर्म-न्याय-निति को समाज में लागू करने हेतु सन्त ज्ञानेश्वर जी के सकल शिष्य समाज संकल्पित एवं समर्पित हैं।






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