अवैध मिट्टी खनन पर्यावरणीय दोहन व शासन की नीतियों की खुली अवहेलना

लखीमपुर खीरी , 120

लखीमपुर खीरी। मोहम्मदी क्षेत्र में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन अपने चरम पर है। शासन-प्रशासन की नीतियों और पर्यावरणीय संतुलन को ताक पर रखकर यह कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। यह खनन न केवल प्रशासनिक नियमों की अवहेलना है, बल्कि ग्रामीण भू-पर्यावरण के लिए भी एक गंभीर संकट बनता जा रहा है। परमिशन के नाम पर खुली अनियमितताएं बरती जा रही है हालांकि कुछ स्थानों पर मिट्टी खनन के लिए औपचारिक अनुमति ली गई है, किंतु हकीकत यह है कि इन परमिशनों का उपयोग नियमों के उल्लंघन को वैध रूप देने में किया जा रहा है। नियम के अनुसार प्रत्येक ट्रॉली में पल्ली डालना आवश्यक होता है ताकि खनन की मात्रा का निर्धारण व अवलोकन हो सके, लेकिन वास्तविकता में पल्ली डालना तो दूर, ट्रॉलीयों की ओवरलोडिंग आम बात हो गई है।भट्टों के लिए खुदाई की जा रही मिट्टी  की गहराई, पर्यावरणीय क्षति और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके।  मानक  से अधिक गहराई तक अवैध खुदाई की जा रही है। प्रशासनिक नियमों की उड़ रही धज्जियां खनन माफियाओं द्वारा नियमों की अनदेखी करना अब एक आम बात हो गई है। क्षेत्र में दिनदहाड़े खनन कार्य चल रहे हैं, जिन पर कोई रोक नहीं लग रही। ग्रामीणों द्वारा शिकायतें करने पर भी स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।पर्यावरणीय असर और ग्रामीणों की चिंता।अत्यधिक खुदाई के कारण भूमि कटाव, जलस्तर में गिरावट, खेतों की उपजाऊ क्षमता में कमी और प्राकृतिक असंतुलन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की कृषि व्यवस्था बर्बाद हो जाएगी और भू-गर्भीय जल स्रोत भी नष्ट हो जाएंगे।  सभी नियमों का खनन माफिया खुलेआम उल्लंघन कर रहा है, और प्रशासन मौन दर्शक बना हुआ है। यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के जीवन से जुड़ा है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई, तो यह क्षेत्र पर्यावरणीय आपदा की ओर अग्रसर होगा। अब आवश्यकता है जन-जागरण, मीडिया की भूमिका और प्रशासनिक दृढ़ता की, ताकि मोहम्मदी और आसपास के क्षेत्रों को इस अवैध खनन के विनाशकारी प्रभावों से बचाया जा सके।

Related Articles

Comments

Back to Top