“यह संसार झूठा, सत्य केवल परमेश्वर : महात्मा महेन्द्रानंद दास

लखीमपुर खीरी , 116

हरिद्वार/लखीमपुर। सन्त स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में वैशाखी के पावन अवसर पर  श्री हरिद्वार आश्रम में चल रहे सत्संग कार्यक्रम में महात्मा महेंद्रानन्द दास ने कहा, यह संसार जैसा दिख रहा है इसकी यथार्थता वैसा नहीं है। यह दिखता जरूर है लेकिन जिस प्रकार अंधेरे में रस्सी भी सर्प जैसे प्रतीत होती है, इसी प्रकार ये संसार अज्ञान की अवस्था में सत्य जैसा दिखाई देता है । जैसे “झूठहू सत्य जाहि बिनु जाने, जिमि भुजंग बिनु रजु पहचाने” उन्होंने इसका अर्थ समझाते हुए कहा, यह संसार है तो झूठ लेकिन यथार्थ ज्ञान न होने के कारण यह सब सत्य प्रतीत होता है और जब भगवान असीम कृपा करके सदगुरु रूप में ज्ञान देते है तब यह स्पष्ट देखने को मिलता है कि यह संसार सत्य नही बल्कि सब असत्य है, “जेहि जाने जग जाए हेराई, जागे जथा सपन भ्रम जाई”।  जैसे जब ज्ञान रूपी प्रकाश रस्सी रूपी संसार पर पड़ता है तब दिखाई देता है की संसार बद से भी बदतर झूठा है । हमारे सदगुरु देव परमपूज्य संत ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परहंस ने ज्ञान दृष्टि देकर दिखाया की देखो एक मात्र परमब्रह्म ही सत्य है बाकी सारा संसार मिथ्या है जैसे की लिखा है-  ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या । सत्संग के पश्चात उनके भजन – “जगत प्रीत मत करियो रे मनवा” को सुनकर सभी झुमने लगे । कार्यक्रम में कमल, दीपक, दशरथ, मीरा, सुनीता, रघुराज, सुरेश, करण, सूरज आदि दूर दराज से आए सैकड़ों भगवान जी के भक्त सेवक उपस्थित रहे।

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