कलश को विश्व ब्रह्माण्ड का प्रतीक माना गया

लखीमपुर खीरी , 254

लखीमपुर खीरी।कलश में सभी तेंतीस कोटि देवशक्तियां निवास करती हैं।कलश को विश्व ब्रह्माण्ड का प्रतीक माना गया है। वैदिक काल से ही शुभ अवसरों पर कलश स्थापन व पूजन का प्रचलन चला आ रहा है भारतीय संस्कृति में कलश का बहुत बड़ा महत्व है। सभी में जल जैसी शीतलता एवं कलश जैसी पात्रता का विकास हो।कलश के मुख में विष्णु,कंठ स्थान में रुद्र और मूल में ब्रह्मा का निवास है। मध्य स्थान में मात्रका गण सहित तेंतीस कोटि देवी देवताओं का निवास होता है। इसलिए सनातन धर्म में हर शुभ कार्यक्रम में कलश का स्थापन किया जाता है। उक्त अमृत वचन हैं श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के संस्थापक अध्यक्ष पं राजेश दीक्षित के जिन्होंने श्री वेदमाता गायत्री शक्तिपीठ नवीन प्रयाग मेंला में कलश शोभायात्रा में शामिल हुए हैं माताओं बहनों को संबोधित करते हुए कहा।कलश शोभायात्रा नौ कुण्डीय यज्ञशाला से कलशों को लेकर शारदा नगर के प्रसिद्ध बालाजी मंदिर में पहुंचकर पूजन किया गया फिर भक्ति मय प्रज्ञा गीत संगीत गाते हुए गायत्री परिवार के नारे लगाते हुए मां शारदा नदी के तट पर पूजन कर पावन जल कलशों में भरकर नौ कुण्डीय यज्ञशाला में स्थापित कर आरती करने के बाद प्रसाद वितरण किया गया।कलश शोभायात्रा का नेतृत्व सरोजनी मिश्रा ने किया व व्यवस्था संभाली पं उपेंद्र मिश्रा ने तथा गीत संगीत दिया बाबू राम शाक्य व चन्नू दास की टोली ने। महायज्ञ में 10 फरवरी को प्रातः आठ बजे से देव पूजन नौ कुण्डीय यज्ञशाला में प्रारंभ होगा। महायज्ञ माघी पूर्णिमा 12 फरवरी तक चलेगा।

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