“वैज्ञानिक और आध्यात्मिक आपस में विरोधी न बनें : महात्मा दिलेश्वरानंद जी

लखीमपुर खीरी , 437

“भगवत् कृपा ही केवलम्”

                          
महाकुंभनगर प्रयागराज/ लखीमपुर। 
                                     सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस द्वारा संस्थापित संस्था सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के तत्त्वावधान में महाकुंभ मेला हरिश्चंद्र चौराहा स्थित शिविर में सत्संग सुनाते हुए महात्मा दिलेश्वरानन्द ने कहा, योगी महात्मा और वैज्ञानिक दोनों के क्रिया-कलाप एक समान होते हैं । योगी-महात्मा का कार्य चेतन-आत्मा से सम्बन्धित होता है जबकि वैज्ञानिक का कार्य जड़ जगत् से सम्बन्धित होता है । उदाहरण के लिये वैज्ञानिक यदि विद्युत शक्ति केन्द्र वाला है तो योगी-महात्मा चेतन सत्ता केन्द्र वाला । वैज्ञानिक मानव को सांसारिक—भौतिक विकास की जानकारी और लाभ प्रदान करते हैं तो योगी महात्मा सामान्य मानव को जीवात्मा और उसके आध्यात्मिक उत्थान की जानकारी और लाभ उपलब्ध कराते हैं। 
महात्मा जी ने आगे बताया कि योगी-महात्मा और वैज्ञानिक को कभी एक-दूसरे के विरोधी का पक्ष नहीं बनना अथवा लेना चाहिए क्योंकि अध्यात्म और विज्ञान एक-दूसरे के लिए अनिवार्य पहलू हैं । साथ ही दोनों का आपस में घनिष्ट सम्बन्ध भी होता है जिसको संसार के अन्तर्गत नासमझदारी और अभिमान वश इन्कार भले ही किया जाय, परन्तु मिटाया अथवा समाप्त नहीं किया जा सकता है। 
विज्ञान और अध्यात्म, दोनों ही परमब्रम्ह-परमेश्वर-सर्वोच्च शक्ति-सत्ता से उत्पन्न संसार-शरीर और जीवात्मा से सम्बन्धित दो पद्धतियाँ है, जो वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों ही परमब्रम्ह-परमेश्वर-सर्वोच्च शक्ति-सत्ता के प्रतिनिधि होते हैं। ये दोनों ही परमेश्वर द्वारा भेजे जाते हैं कि बैज्ञानिक मनुष्य की आवश्यकतानुसार नयी-नयी वस्तुओं का आविष्कार कर उन्हें सन्तुष्ट रखें तथा आध्यात्मिक महापुरुष शान्ति और आनन्द मय वातावरण बनाकर समाज में अमन-चैन कायम रखें अर्थात नाना विधि-विधानों और साधन-साधनाओं से मानव-समाज को शान्ति और आनन्द मय कायम रखें। परन्तु यहाँ आकर दोनों प्रकार के मान्यता वाले लोग आपस में मिलकर कार्य करने के बजाय आपस में विरोधी रूप लेकर दोनों एक-दूसरे को मिथ्या और महत्वहीन सावित करने में लग जाते हैं और लगे भी हैं।‘‘जब घोर अशान्ति की लहर भू-मण्डल पर छाता है । उसी वक्त परमप्रभु भू-मण्डल पर आता है।।’’ इसीलिए वही परमप्रभु भू-मण्डल पर पुनः आया और सभी को ठीक करने में जुट गया उसी के आदेश निर्देश में यह संस्था धर्म धर्मात्मा धरती रक्षा कार्य में लगा है । बात केवल जानने-देखने और पहचानने की है।

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