दस दिन बाद भी वन कर्मियों की पहुच से दूर बाघ, क्षेत्र मे दहशत बरकरार
लखीमपुर खीरी Sep 06, 2024 at 07:30 PM , 222अजान-खीरी। दक्षिणी खीरी वन प्रभाग के महेशपुर वन रेज क्षेत्र के ग्राम इमलिया अजान मे आदमखोर बाघ के खौफ से ग्रामीणों को दस दिन बाद भी वन विभाग निजात नहीं दिला पाया है। बाघ के खौफ के चलते महेशपुर वन रेज क्षेत्र के दर्जनों गांवों का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। लोग अधिकांश तौर पर अपने घरों में ही कैद हो कर रहने को मजबूर हैं, महेशपुर वन रेज क्षेत्र के ग्रामीण पिछले एक साल से ही इलाके में बाघों की दस्तक की शिकायत कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना था कि बाघ क्षेत्र मे एक नहीं है क ई बाघ हैं। ज्यादातर उनकी आवाजाही गांव के इर्द गिर्द ही है। तमाम लोगो ने भी बाघ देखे जाने की पुष्टि की थी। लेकिन इससे पहले कि ग्रामीणों की इस शिकायत पर कोई कार्रवाई हो पाती, बाघ महेशपुर वन रेज क्षेत्र में पिछले एक साल मे करीब 5 लोगो को बाघ अपना निवाला बना चुका है। इसके बाद 27 अगस्त को ग्राम इमलिया मे गन्ना बाधने गये अमरीश कुमार को बाघ ने निवाला बना लिया था। घटना के बाद से करीब एक दर्जन गांवों में खौफ का सन्नाटा पसर गया। हमलावर बाघ को पकड़ने के लिए यहां वन विभाग के साथ प्रशासन डेरा डाले हुए है। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं। वन विभाग और प्रशासन की टीम प्रयासों मे जुटी है। उन्होंने ग्रामीणों से बाघ को लेकर किसी तरह की सूचना मिलने पर वन विभाग पुलिस और प्रशासन को दिया जाने की अपील भी की। बाघ का खौफ झेल रहे ग्रामीणों को बाघ के आतंक से निजात दिलाए जाने के वन विभाग के प्रयास बाघ की होशियारी से परवान नहीं चढ रहे हैं। 27 अगस्त की घटना के बाद से ही हमलावर बाघ को पकडने के लिए वन विभाग के साथ प्रशासन डेरा डाले हुए है। लेकिन अभी तक वन विभाग के हाथ खाली है। जिससे वन विभाग को उसे ट्रेकुलाइज करने या पिजरो मे कैद करने मे लगातार असफलता मिल रही है। वही बाघ प्रभावित गावों मे ग्रामीणों का जनजीवन एक तरह से अस्त व्यस्त हो चला है। बाघ के खौफ के चलते ग्रामीण अपनी स्वाभाविक दिन चर्या से जीवन यापन नहीं कर पा रहे हैं हमला वर बाघ कैद न होने के कारण उन पर बाघ के खौफ का मनोवैज्ञानिक दबाव बना हुआ है। बाघ प्रभावित गावों के बच्चे भी अपने मा बाप के साथ ही घरो में कैद होकर रह गए हैं। चितित मा बाप अपने बच्चों पर सख्त निगरानी रखे हुए है। जिससे बच्चे का खेलना कूदना भी बंद हो गया है।लोगो में बाघ का खौफ इतना ज़्यादा है कि लोग सुबह और शाम को टहलने भी नही जा पा रहे हैं






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