*रात में धान खरीद-बिक्री का कथित खेल, दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बाहर जा रहा धान; सरकारी क्रय केंद्र न खुलने से बिचौलियों की चांदी।*
लखीमपुर खीरी Oct 12, 2026 at 05:40 PM , 2*किसान औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर।*
पलियाकलां/लखीमपुर खीरी। पलिया तहसील क्षेत्र में धान की खरीद को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। आरोप है कि रात के अंधेरे में दलालों के माध्यम से दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में धान भरकर क्षेत्र से बाहर भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह सिलसिला रोजाना रात करीब 11:30 बजे के बाद शुरू होता है और देर रात तक धान से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही जारी रहती है। वहीं, पलिया कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में अब तक सरकारी धान क्रय केंद्र शुरू नहीं होने की बात सामने आने से किसानों की परेशानी और बिचौलियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
*किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे बिचौलिए?*
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ दलाल किसानों से कम कीमत पर धान खरीदकर उसे दूसरे स्थानों पर भेज रहे हैं। किसानों को यदि समय पर सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेचने की सुविधा नहीं मिलती है, तो उन्हें मजबूरी में कम दामों पर धान बेचने का दबाव झेलना पड़ सकता है। ऐसे में किसानों की मेहनत की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, धान की खरीद किस कीमत पर हो रही है और उसे कहां ले जाया जा रहा है,
*मंडी परिसर में सरकारी क्रय केंद्रों का इंतजार*
धान खरीद के सीजन में किसानों को उम्मीद रहती है कि सरकारी क्रय केंद्रों के माध्यम से उनकी उपज की खरीद निर्धारित व्यवस्था के तहत होगी। लेकिन पलिया कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में सरकारी क्रय केंद्र शुरू नहीं होने की शिकायत के बीच सवाल उठ रहा है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? यदि समय रहते खरीद व्यवस्था सुचारु नहीं हुई, तो किसानों को निजी खरीदारों और बिचौलियों पर निर्भर होना पड़ सकता है।
*रात 11:30 बजे के बाद दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही पर सवाल*
आरोप है कि रात करीब 11:30 बजे के बाद धान से भरी दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां क्षेत्र से बाहर निकलती हैं। यदि यह गतिविधि नियमित रूप से हो रही है, तो संबंधित विभागों के लिए इसकी जांच करना जरूरी है। आखिर धान कहां से खरीदा जा रहा है, किस स्थान पर पहुंचाया जा रहा है और इसकी खरीद-बिक्री किन नियमों के तहत हो रही है? इन बिंदुओं पर संबंधित अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
*प्रशासन और मंडी समिति से कार्रवाई की मांग*
मामले को लेकर अब प्रशासन, मंडी समिति और कृषि विभाग की भूमिका पर निगाहें टिकी हैं। जरूरत है कि सरकारी धान क्रय केंद्रों को जल्द शुरू कराने की स्थिति स्पष्ट की जाए, किसानों को सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ दिलाया जाए और रात के समय धान की ढुलाई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसान अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी क्रय केंद्रों का इंतजार कर रहे हैं, तो रात के अंधेरे में धान की खरीद और ढुलाई का कथित सिलसिला कैसे चल रहा है? क्या संबंधित अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर जांच कराएंगे और किसानों को राहत दिलाएंगे, या फिर किसान इसी तरह बिचौलियों के भरोसे रहने को मजबूर होंगे?
फिलहाल, धान की खरीद, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही और सरकारी क्रय केंद्रों की स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।






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