सोलर पैनल तो मिले,लेकिन चोरों पर रहस्य बरकरार मोहम्मदी पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

लखीमपुर खीरी , 7

मोहम्मदी खीरी। पुलिस चौकी रेहरिया क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम हिम्मतपुर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ खेत की सिंचाई के लिए लगे लाखों रुपये के सोलर पैनल की चोरी और फिर 6 दिन बाद उसकी संदिग्ध बरामदगी ने पूरी घटना को रहस्यमय बना दिया है। पीड़ित किसान को उसके सोलर पैनल तो वापस मिल गए हैं, लेकिन चोर कौन थे और उन्हें पुलिस क्यों छिपा रही है, इस पर सस्पेंस बना हुआ है। पुलिस की इस अजीबोगरीब कार्यप्रणाली को लेकर अब स्थानीय ग्रामीणों और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम हिम्मतपुर निवासी किसान महेंद्र सिंह कुशवाहा पुत्र कालिका सिंह ने अपनी फसल की सिंचाई के लिए खेत में सोलर पैनल का पूरा सेट लगवाया था। पीड़ित के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2026 की रात करीब 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच अज्ञात चोरों ने धावा बोलकर खेत से सोलर पैनल की प्लेट्स पार कर दीं। सुबह जब किसान खेत पर पहुँचा, तब उसे इस बड़ी चोरी का पता चला। पीड़ित किसान ने तुरंत कोतवाली मोहम्मदी में लिखित शिकायती पत्र देकर अज्ञात चोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।इस पूरे मामले में नया और चौंकाने वाला मोड़ 11 अक्टूबर 2026 को आया। जब पीड़ित किसान से संपर्क किया गया, तो उसने बताया कि पुलिस ने उसके चोरी हुए सोलर पैनल बरामद कर लिए हैं और उसे वापस भी सौंप दिए हैं। लेकिन इस बरामदगी के पीछे की कहानी बेहद संदिग्ध है।पीड़ित किसान का आरोप है कि जब उसने पुलिस से पूछा कि ये पैनल किसके पास से बरामद हुए हैं, तो पुलिस ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि ये किसी 'क्रेता' (खरीदार) से मिले हैं।जब किसान ने मांग की कि उस क्रेता को उसके सामने लाया जाए, तो पुलिस ने साफ इनकार कर दिया। पुलिस का तर्क है कि "जब मुलजिम पकड़े जाएंगे तब आपको जानकारी दी जाएगी, और तभी सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई होगी।अब बड़ा सवाल यह है कि बिना एफआईआर बरामदगी कैसे,5 अक्टूबर को लिखित तहरीर देने के बावजूद 11 अक्टूबर तक पुलिस ने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की,यदि कोई मुकदमा ही दर्ज नहीं था, तो पुलिस ने किस कानूनी हैसियत से माल की बरामदगी दिखाई,क्रेता को क्यों छिपा रही है पुलिस,अगर सोलर पैनल किसी खरीदार (क्रेता) के पास से मिले हैं,तो चोरी का माल खरीदने के जुर्म में वह भी इस अपराध का हिस्सा है। उसे सामने न लाकर पुलिस किसे बचाने की कोशिश कर रही है,कानूनी प्रक्रिया कहाँ है,बरामदगी की फर्द (मेमो), गवाह, बरामद माल का रिकॉर्ड और क्रेता-विक्रेता के खिलाफ की गई कार्रवाई का कोई भी आधिकारिक दस्तावेज पीड़ित किसान को नहीं दिया गया।इस संदिग्ध बरामदगी और पुलिस के टालमटोल वाले रवैये से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर का माहौल है। क्षेत्र में लगातार हो रही सोलर पैनल चोरी की घटनाओं से किसान पहले ही परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चोरों और खरीदारों को इस तरह संरक्षण देने से अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर मोहम्मदी पुलिस की इस संदिग्ध कार्यशैली पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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