73 वर्षीय बुजुर्ग महिला साबरून को मिलेगा भरण-पोषण अदालत ने पति मुस्तफ़ा को हर माह 3000 रुपये देने का दिया आदेश हर महीने की 10 तारीख तक देनी होगी धनराशि

लखीमपुर खीरी , 8

कुकरा खीरी। उम्र के आखिरी पड़ाव पर भरण-पोषण और दवा-इलाज के लिए परेशान 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला को अदालत से राहत मिली है। लखीमपुर खीरी की सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/एफटीसी अदालत ने अंतरिम भरण-पोषण के मामले में साबरून की अर्जी स्वीकार करते हुए विपक्षी मुस्तफा पुत्र ग़फ़ूर ग्राम रमपुरवा मजरा दरियाबाद थाना भीरा को हर महीने तीन हजार रुपये देने का आदेश दिया है।अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह धनराशि प्रत्येक माह की 10 तारीख तक अदा करनी होगी।न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र के मुताबिक,साबरून ने आरोप लगाया कि उसका निकाह करीब 48 वर्ष पहले मुस्तफा के साथ मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार हुआ था।साबरून का कहना है कि पति उसे प्रताड़ित करता था और दिनाक- 10/8/ 2019 को मारपीट कर घर से निकाल दिया था। इसके बाद से उसकी कोई खोज-खबर नहीं ली गई। बुजुर्ग महिला ने अपनी उम्र और असमर्थता का हवाला देते हुए कहा कि वह स्वयं अपना भरण-पोषण करने और दवा-इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है।

अदालत ने माना, भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति मुस्तफ़ा की

न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों का अवलोकन किया। आदेश में कहा गया कि विपक्षी मुस्तफा की पत्नी होने के नाते साबरून के भरण-पोषण की जिम्मेदारी विपक्षी की है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि विपक्षी की ओर से अंतरिम भरण-पोषण की अर्जी पर कोई आपत्ति दाखिल नहीं की गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने महिला की मांग स्वीकार करना उचित माना।अदालत ने आदेश दिया कि मुस्तफा अपनी पत्नी साबरून को प्रत्येक माह की 10 तारीख तक तीन हजार रुपये अंतरिम भरण-पोषण के रूप में देना सुनिश्चित करें।

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