सनातन धर्म सरस्वती शिशु मन्दिर मिश्राना में मनाया गया विश्व पशु संरक्षण दिवस
लखीमपुर खीरी Oct 03, 2026 at 05:58 PM , 0बेजुबानों की रक्षा ही असल में हमारी अपनी रक्षा है: हीरा सिंह
लखीमपुर खीरी: विद्या भारती से संबद्ध विद्यालय, सनातन धर्म सरस्वती शिशु मन्दिर मिश्राना, लखीमपुर खीरी में शनिवार को वन्दना स्थल पर "विश्व पशु संरक्षण दिवस" कार्यक्रम अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन एवं वंदना के साथ हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती हीरा सिंह ने आज के कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए कहा कि वैसे तो यह दिवस प्रतिवर्ष 4 अक्टूबर को मनाया जाता है, परन्तु कल रविवार का अवकाश होने के कारण इसे आज विद्यालय में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। उन्होंने बच्चों को इस दिवस के महत्व से परिचित कराया।इस अवसर पर विद्यालय की आचार्या श्रीमती पूजा मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य पशुओं के प्रति प्रेम, दया और उनकी सुरक्षा के बारे में लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने याद दिलाया कि यह धरती सिर्फ इंसानों की नहीं, बल्कि सभी जीव-जंतुओं की है। पशु, पक्षी और पेड़-पौधे सभी इस सुंदर प्रकृति का अभिन्न हिस्सा हैं।विद्यालय के उप प्रधानाचार्य ज्ञानेंद्र कुमार बाजपेई ने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए बताया कि प्राचीन काल में हमारे देश में पशुओं को देवता स्वरूप माना जाता था, जहाँ गाय को माता, हाथी को गणेश जी और बंदर को हनुमान जी का रूप मानकर पूजा जाता है। परन्तु अत्यंत दुखद है कि आज हम इंसान ही पशुओं के सबसे बड़े दुश्मन बन गए हैं।वहीं विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य राकेश कुमार तिवारी ने वर्तमान पारिस्थितिक संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई से पशुओं के घर उजड़ रहे हैं। मानवीय स्वार्थ के कारण शेर, बाघ और हाथी जैसे जीवों का शिकार कर उनकी खाल, दांत और हड्डियों का व्यापार किया जा रहा है। प्रदूषण और प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से हर साल लाखों बेजुबान दम तोड़ रहे हैं, जिससे चीता, गैंडा और गिद्ध जैसी कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गई हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने सचेत किया कि यदि मधुमक्खी, गिद्ध या बाघ जैसे जीव समाप्त हो गए, तो प्रकृति की पूरी खाद्य श्रृंखला और संतुलन बिगड़ जाएगा। इस अवसर पर सभी ने पर्यावरण और जीव रक्षा के लिए निम्नलिखित संकल्पों पर बल दिया,पशुओं पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना।प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करना।अधिक से अधिक पेड़ लगाना ताकि पक्षियों को आश्रय मिल सके।आवारा पशुओं को मारने के बजाय उन्हें भोजन और पानी देना।वन्य जीवों से बनी वस्तुएं (जैसे चमड़े के बैग,हाथी दांत की चीजें न खरीदना।कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रसिद्ध कथन किसी भी राष्ट्र की महानता और उसकी नैतिक प्रगति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने पशुओं के साथ कैसा व्यवहार करता है को दोहराते हुए सभी छात्रों और आचार्यों ने बेजुबानों को दुख न पहुँचाने और उनकी रक्षा करने का सामूहिक प्रण लिया।इस वैचारिक और चेतना जगाने वाले कार्यक्रम में शिशु मन्दिर का समस्त आचार्य परिवार एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।






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