बड़ी रेल लाइन की मांग लेकर पलिया की जनता सड़क पर उतरी,हुई नारेबाजी और प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

लखीमपुर खीरी , 0

विश्वकांत त्रिपाठी 

पलिया कलां‌ लखीमपुर खीरी । मैदानी -नानपारा रेल खंड ऊं ब्रॉडगेज की वर्षों पुरानी मांग को लेकर मंगलवार को‌ पलिया तहसील क्षेत्र के आमजनों में आक्रोश देखा गया। आम जन समुदाय किसान, क्षेत्रवासी और व्यापारियों जुलूस निकालकर जमकर रेल विभाग की अनदेखी का विरोध तथा नारेबाजी की।   लोगों ने रेलवे स्टेशन चौराहे पर जनसभा कर अपनी आवाज बुलंद की और तहसील पहुंचकर एसडीएम की अनुपस्थिति में नायब तहसीलदार को रेल मंत्रालय के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।
    स्टेशन चौराहे पर आयोजित जनसभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि तराई का यह महत्वपूर्ण कृषि और व्यापारिक केंद्र आज रेल संपर्क से वंचित है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के कारण पलिया क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से बेहद खास है, लेकिन बड़ी रेल लाइन न होने से यहां का औद्योगिक और व्यापारिक तथा सामाजिक विकास पूरी तरह से ठप पड़ा है। पलिया के किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, राजकीय महाविद्यालय बंदी के कगार पर छात्र-छात्राओं के आवागमन ‌न होने से ग्रामीण इलाकों के छात्र महाविद्यालय नहीं पहुंचे पा रहे‌ है,सरकार को जनता की इस न्याय संगत मांग पर संज्ञान लेना चाहिए।
इस प्रदर्शन में अनूप मिश्रा व्यापार मंडल कंचल गुट के अध्यक्ष गौरव गुप्ता, अमित महाजन, राजेश गुप्ता, व्यापार मंडल अध्यक्ष अनूप मिश्रा, किसान नेता बलराम गुप्ता, समाजसेवी आलोक मिश्रा, संजीव कुमार मुन्ना और समाजवादी पार्टी के नरेश यादव, कम्युनिस्ट पार्टी से अनीता राय, कमलेश राय, स्कूल कालेजों के छात्र, पत्रकार, समाज सेवी,समेत तमाम लोग मौके पर मौजूद रहे। कांग्रेस नेता बलराम गुप्ता ने रेल लाइन न होने से हो रही समस्याओं से सभी को अवगत कराया।
     नायब तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि पलिया कलां को बड़ी रेल लाइन से जोड़ने की परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। इसके साथ ही आमान परिवर्तन का तत्काल आवश्यक सर्वेक्षण कराने, पूर्व में किए गए प्रस्तावों की समीक्षा कर प्रशासनिक कार्यवाही आगे बढ़ाने और परियोजना के लिए बजट आवंटित कर समयबद्ध सीमा में कार्य पूरा करने की बात कही गई है।प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जनता की इस वर्षों पुरानी मांग पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो क्षेत्र के लोग बड़े पैमाने जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे इसकी इसमें रेल विभाग तथा केंद्र और राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी इस दौरान विभिन्न व्यापारिक संगठनों, यूनियनों और स्थानीय नागरिकों की भारी मौजूदगी रही।

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