वक्त की मार से टूटा पत्रकार परिवार, दो साल से बिस्तर पर तड़प रहा कलम का सिपाही

लखीमपुर खीरी , 0

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रेहान खान  पहुंचे पीड़ित पत्रकार  के घर आर्थिक मदद कर जताई हमदर्दी 

लखीमपुर-खीरी  कहते हैं वक्त बड़ा बेरहम और बलवान होता है। हंसता-खेलता आशियाना कब मातमकदा बन जाए कोई नहीं जानता। कुछ ऐसा ही दर्दनाक मंजर मोहल्ला नई बस्ती में देखने को मिल रहा है, जहां कलम के सिपाही सैय्यद मुशीर की जिंदगी दो साल से चारपाई पर सिमट कर रह गई है और पूरा परिवार मुफलिसी और बेबसी के आलम में आंसू बहाने को मजबूर है।
सैय्यद मुशीर ने साल 2020 में  पत्रकारिता की दुनिया में संवाददाता के रूप में कदम रखा । अपनी मेहनत और लगन से वह जल्द ही खबर प्रवाह के जिला संवाददाता बन गए और पूरे जनपद में अपनी टीम खड़ी की। इसके बाद उन्होंने अपनी शरीक-ए-हयात शीरी जैदी को भी पत्रकारिता के मैदान में उतारा, जो आज सुनहरा संसार और खबर प्रवाह की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। दो साल पहले एक दर्दनाक कार हादसे में मुशीर शदीद तौर पर जख्मी हो गए। कमर और पैरों में ऐसी चोट आई कि वह दोबारा अपने कदमों पर खड़े न हो सके। दो साल से वह बिस्तर पर पड़े जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं। इलाज में जो जमा-पूंजी थी सब खत्म हो गई, यहां तक कि घर का सामान तक बेचना पड़ा। अब न दवा के लिए पैसे हैं न घर चलाने का कोई जरिया।
इस वक्त इस टूटे हुए आशियाने का सारा बोझ पत्रकार शीरी जैदी के नाजुक कंधों पर है। घर मे एक मासूम बच्चा, सामने बिस्तर पर तड़पता शौहर और ऊपर से मुफलिसी का पहाड़। वह किस कर्ब और तकलीफ में अपनी जिंदगी के दिन काट रही हैं, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। एक तरफ शौहर की बेबसी और दूसरी तरफ बच्चे की परवरिश, शीरी के लिए हर दिन एक नया इम्तिहान बन गया है।
इस गमजदा परिवार की हालत की खबर सुनकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रेहान खान उनके घर पहुंचे। उन्होंने मुशीर की गंभीर हालत देखी और उनकी पत्नी शीरी जैदी को एक लाख रुपये की माली मदद दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचाया जाएगा और आगे भी हर मुमकिन मदद दिलाई जाएगी।

Related Articles

Comments

Back to Top