लखीमपुर खीरी में पुलिस की 'दबंगई' आधी रात को बिना वारंट पीड़ित के घर बोला धावा
लखीमपुर खीरी Sep 15, 2026 at 05:57 PM , 0वीडियो बनता देख उल्टे पैर भागी पुलिस,सवाल पूछने पर पत्रकार पर भड़के सदर कोतवाल
एपी सिंह
लखीमपुर खीरी।उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में खाकी को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है,जहाँ कानून के रखवाले ही नियमों की धज्जियाँ उड़ाते नजर आए। सदर कोतवाली इलाके के देवकली रोड पर देर रात करीब 1 बजे, जब पूरा इलाका सो रहा था, तब पुलिस बिना किसी वारंट और बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए एक पीड़ित परिवार के घर का दरवाजा तोड़ने पहुँच गई। लगभग 2 घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया और मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया, तो पुलिसकर्मी अपनी गाड़ियों के साथ मौके से भाग खड़े हुए।हद तो तब हो गई जब इस मामले पर जानकारी माँगने पर सदर कोतवाल पत्रकार पर ही भड़क गए और बोले हमें कानून मत सिखाओ।जानकारी के अनुसार, पडुवा थाना इलाके की एक बालिग लड़की ने सदर कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले किशन बाबू के साथ हाई कोर्ट में विवाह कर लिया है। लड़की के परिवार वालों ने इसके बाद किशन बाबू के खिलाफ पडुवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।विवाह की जानकारी मिलते ही लड़के के पिता बहादुर लाल ने पहले ही अपने बेटे को संपत्ति और परिवार से बेदखल कर दिया था। इसकी लिखित सूचना उन्होंने पडुवा थाना, कोतवाली सदर, खीरी एसपी और आईजी लखनऊ तक को दी थी, ताकि उन्हें परेशान न किया जाए। इस पर आईजी ने मामले की जाँच के निर्देश भी दिए थे।
आधी रात को मचाया उत्पात, दहशत में परिवार
पीड़ित बहादुर लाल ने बताया कि वह रात को अपने छोटे बच्चों के साथ घर पर सो रहे थे। तभी निजी कारों और मोटरसाइकिलों से पहुँची दूसरे थाने की पुलिस ने किसी बड़े अपराधी की तरह उनके घर का गेट तोड़ना शुरू कर दिया। कोर्ट और मानवाधिकार आयोग के निर्देशों का खुला उल्लंघन करते हुए पुलिस ने करीब 2 घंटे तक वहाँ उत्पात मचाया, जिससे पूरा परिवार गहरे खौफ में है।
जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी
इस गंभीर मामले में जब पुलिस के आला अधिकारियों और थाना प्रभारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा,पडुवा थाना प्रभारी मोहित पुंडीर का फोन बंद पाया गया।सीओ निघासन के सीयूजी नंबर पर कई बार फोन किया गया, लेकिन उनका नंबर भी बंद रहा।सदर कोतवाल राजेश सिंह से जब इस घटना पर सवाल पूछा गया, तो वह भड़क गए और कानून की दुहाई देने लगे।आईजी के पीआरओ को सुबह फोन किया गया, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला।
बिना वारंट और बिना किसी नामजदगी के आधी रात को पीड़ित परिवार के घर पर इस तरह की छापेमारी से खीरी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस न्यायालय और मानवाधिकारों के गाइडलाइंस को ताक पर रखकर काम कर रही है। पीड़ित परिवार ने अब इस मामले में उच्च अधिकारियों से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।






_page-0001.jpg)
























Comments