1.80 करोड़ की डिक्री वसूली के लिए सरकारी संपत्तियों की कुर्की के आदेश

लखीमपुर खीरी , 8

लखीमपुर खीरी। करीब दो दशक पुराने वसूली विवाद में सिविल जज (सीनियर डिवीजन), लखीमपुर खीरी की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। पंजाब टेंट हाउस बनाम उपजिला निर्वाचन अधिकारी आदि के मामले में डिक्री की करीब 1.80 करोड़ रुपये की देय धनराशि की वसूली के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय से संबंधित चल संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही दो सरकारी वाहनों के स्वामित्व का सत्यापन कराने के भी आदेश दिए गए हैं।

न्यायालय के 9 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार मूल वाद संख्या 40/2004 में पंजाब टेंट हाउस की ओर से 74,99,120 रुपये की वसूली के लिए वाद दायर किया गया था। मामले में 19 फरवरी 2016 को निर्णय पारित करते हुए प्रतिवादियों को उक्त धनराशि पर छह प्रतिशत सामान्य वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया गया था। भुगतान न होने पर डिक्रीदार की ओर से वर्ष 2017 में निष्पादन वाद दाखिल किया गया।

पत्रावली के अनुसार डिक्री की धनराशि का भुगतान नहीं होने पर विभिन्न स्तरों पर वसूली की कार्रवाई की गई। डिक्रीदार की ओर से उपलब्ध कराए गए बैंक खातों को कुर्क किए जाने के बावजूद डिक्री की पूरी धनराशि की संतुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद चल एवं अचल संपत्तियों की कुर्की और नीलामी के माध्यम से डिक्री की धनराशि की वसूली का अनुरोध न्यायालय से किया गया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि डिक्रीदार द्वारा बताई गई चल संपत्तियों में जिला निर्वाचन कार्यालय के कुर्क योग्य फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं अन्य वस्तुओं को चिन्हित कर उनका मूल्यांकन कराया जाए। इसके लिए डिक्रीदार को आवश्यक धनराशि जमा कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।

आदेश में UP31 G 0682 और UP31 G 0644 नंबर के दो वाहनों का भी उल्लेख है। संबंधित अधिकारी को दोनों वाहनों के स्वामित्व का सत्यापन कर अपनी आख्या अगली तारीख तक न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

अचल संपत्ति के संबंध में पत्रावली में विकास भवन, खीरी रोड स्थित भवन तथा जिला निर्वाचन कार्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर का उल्लेख किया गया है। न्यायालय ने संबंधित संपत्तियों के संबंध में आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। हालांकि आदेश में इन अचल संपत्तियों की तत्काल नीलामी का अंतिम आदेश नहीं दिया गया है, बल्कि कुर्की योग्य संपत्तियों की पहचान, मूल्यांकन और स्वामित्व सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई की जानी है।

मामले में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 19 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। उल्लेखनीय है कि मूल विवाद वर्ष 2004 में शुरू हुआ था और वर्ष 2016 में डिक्री पारित होने के बाद भी डिक्रीदार को पूरी धनराशि प्राप्त नहीं हो सकी है।

Related Articles

Comments

Back to Top