कोई गाली दे तो शिकायत थाने में नहीं, राजस्व विभाग में करो - यह फरमान है फूलबेहड़ पुलिस का

लखीमपुर खीरी , 47

(हरिशंकर मिश्र/शाजिफ हुसैन)

महिला पत्रकार को लेखपाल के मोबाइल से दिलवाई मां की गाली, ऑडियो सबूत देने पर भी पुलिस ने की अनदेखी

फर्जी आख्या लगाकर मामले को किया रफा-दफा, सीओ धौरहरा ने भी बिना जांच के लगा दी मोहर

लखीमपुर-खीरी।अगर आपको कोई गाली दे या जान से मारने की धमकी दे तो अब आपको थाने जाने की जरूरत नहीं है, सीधे राजस्व विभाग जाइए। यह अजीबोगरीब फरमान जनपद खीरी की फूलबेहड़ पुलिस ने सुनाया है। पुलिस के इस फरमान से जहां आम जनता हैरान है, वहीं एक महिला पत्रकार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। गौरतलब है कि थाना फूलबेहड़ के ग्राम नरहर का है। मोहल्ला शास्त्री नगर, चौकी मिश्राना निवासी महिला पत्रकार सुनहरा पुत्री अब्दुल मजीद ने बताया कि उसने 5 अगस्त 2026 को ग्राम नरहर में अंबेडकर पार्क की सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर जिलाधिकारी से की थी। आरोप है कि इसी रंजिश में हल्का लेखपाल रवि प्रकाश तोमर ने अपने मोबाइल से दबंग महताब पुत्र मकबूल को फोन देकर महिला पत्रकार को खुलेआम मां की गाली दिलवाई और पत्रकारिता न करने व जान से मारने की धमकी दिलवाई। जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। पीड़िता ने जब इसकी शिकायत जनसुनवाई पोर्टल संख्या 40015326046004, 40015326045937 पर की तो थाना फूलबेहड़ के उपनिरीक्षक अशोक कुमार यादव ने जांच के नाम पर खानापूर्ति कर दी। आरोप है कि न तो लेखपाल की कॉल डिटेल निकाली गई, न ही गाली-गलौज की रिकॉर्डिंग सुनी गई। बल्कि आरोपी महताब की फोटो अपलोड कर 126/135 BNSS में शांति भंग का चालान दिखाकर पिता को पति बता कर पूरे संगीन मामले को रफा-दफा कर दिया और आख्या में लिख दिया कि गाली जानवर को दी गई थी। जबकि हकीकत यह है कि 7 सितंबर को सारा दिन बारिश होती रही और दोनों पक्ष आमने-सामने आए ही नहीं।
पीड़िता ने जब असंतुष्ट फीडबैक दिया तो शिकायत क्षेत्राधिकारी धौरहरा के पास गई, लेकिन वहां से भी बिना नई जांच के वही आख्या दोहरा दी गई। इसके बाद 11 सितंबर को दोपहर 1:31 बजे थाना फूलबेहड़ के मोनू कांस्टेबल ने फोन कर पीड़िता पर थाने आने का दबाव बनाया और बात करने को कहा तो फोन काट दिया। उसी दिन 11:35 बजे सीओ कार्यालय धौरहरा से मोबाइल नंबर 9536056128 से फोन आया, नाम पूछने पर भी नाम नहीं बताया और कहा कि मामला राजस्व का है, थाने मत आओ। सवाल यह है कि गाली-गलौज और धमकी का मामला कब से राजस्व विभाग देखने लगा? । इस पूरे मामले ने फूलबेहड़ पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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