*बैंकों में ताले से 500 करोड़ का लेन-देन ठप: 5 दिवसीय बैंकिंग और समान PLI की मांग को लेकर जोरदार हड़ताल, मुख्य चौराहे तक निकली रैली*
लखीमपुर खीरी Sep 11, 2026 at 05:40 PM , 9(केके शुक्ला)
*लखीमपुर-खीरी।*
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर *11 सितंबर 2026 को आयोजित एक दिवसीय अखिल भारतीय बैंक हड़ताल* के तहत लखीमपुर जनपद में बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। *पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करने और सभी बैंक कर्मियों के लिए समान परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)* की मांग को लेकर जिले के हजारों बैंक अधिकारी-कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार किया।
हड़ताल का नेतृत्व *साथी अतुल मेहरोत्रा एवं साथी अनुराग पांडेय* ने किया।
*PNB मुख्य शाखा के सामने गरजे बैंककर्मी, 500 करोड़ का कारोबार प्रभावित*
सुबह से ही जनपद के सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी अपने-अपने कार्यों का बहिष्कार कर *पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा* के समक्ष एकत्र हो गए।
इस हड़ताल में *भारतीय स्टेट बैंक, इंडियन बैंक (इलाहाबाद बैंक), पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, जिला सहकारी बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, केनरा बैंक* सहित सभी बैंकों के कर्मचारी शामिल रहे।
हड़ताल के कारण जिले में *चेक क्लीयरिंग पूरी तरह ठप* रही, जिससे लगभग *500 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित* रहा। ग्राहकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
*"5 दिन की बैंकिंग केवल सुविधा नहीं, आधुनिक व्यवस्था की जरूरत"*
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा -
> "बैंक कर्मचारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। जब देश के अनेक विभागों, बीमा और RBI में पांच दिवसीय कार्य-सप्ताह लागू है, तो बैंक कर्मचारियों को इससे वंचित रखना अन्याय है। पांच दिवसीय बैंकिंग केवल कर्मचारियों की सुविधा नहीं, बल्कि आधुनिक बैंकिंग की आवश्यकता है।"
दूसरी प्रमुख मांग *समान PLI* को लेकर वक्ताओं ने कहा कि बैंक के व्यवसाय, लाभ और ग्राहक सेवा में हर कर्मचारी-अधिकारी का योगदान है, इसलिए प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था न्यायसंगत, समान और पारदर्शी होनी चाहिए, भेदभावपूर्ण नहीं।
*संकटा देवी से धर्मशाला तक गूंजे नारे*
प्रदर्शन के बाद हड़ताल स्थल से एक जोरदार विरोध रैली निकाली गई। रैली *संकटा देवी चौराहा से मुख्य चौराहा होते हुए धर्मशाला चौराहे तक* गई।
रैली में *"पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करो, समान PLI लागू करो, बैंक कर्मचारियों की एकता जिंदाबाद"* जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।
अंत में सभी संगठनों ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि जब तक जायज मांगों पर सरकार UFBU के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर समाधान नहीं निकालती, तब तक *एकता के साथ संघर्ष जारी रहेगा।*






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