*दुधवा पार्क में घुसा बाढ़ का पानी लाइफलाइन कही जाने वाली सुहेली नदी पडी सूखी।*

लखीमपुर खीरी , 13

पलियाकलां-(खीरी) दुधवा नेशनल पार्क की लाइफलाइन कही जाने वाली सुहेली इस भीषण बाढ़ की स्थिति में भी सूखी पड़ी हुई है वही पास के ही नाकहुआ नदी में बाढ़ का पानी विकराल रुप ले रहा है  बारिश से आने वाला मैदानी इलाकों में तो तबाही मचाता ही है साथ ही दुधवा नेशनल पार्क को भी चपेट में ले लेता है अगर सही समय पर सुहेली नदी की सिल्ट हटाकर गहरी कर दी जाए तो बाढ़ और तेज धार से होने वाली तबाही को रोका जा सकता है।  
*वन्यजीवों पर प्रभाव:* जंगलों में कई फीट पानी भर जाने के कारण गैंडे, बाघ, और बारहसिंगा जैसे दुर्लभ जीवों को ऊंचे स्थानों की ओर शरण लेनी पड़ती है। वन विभाग की टीमें नावों के जरिए जंगलों में पेट्रोलिंग और वन्यजीवों की निगरानी बढ़ा देती हैं। रास्ते और मार्ग प्रभावित: बाढ़ का पानी इतना बढ़ जाता है कि दुधवा-गौरीफंटा मार्ग जैसी महत्वपूर्ण सड़कों और रपटों के ऊपर से पानी बहने लगता है, जिससे यातायात को भी अस्थायी रूप से रोकना पड़ता है। 

*दुधवा पार्क में घुसा बाढ़ का पानी.*

लखीमपुर खीरी : पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के चलते नेपाल की नदियां उफान पर हैं. जिसका असर भारत में दिख रहा है. भारत-नेपाल बॉर्डर से होकर निकलने वाली नदियों ने रौद्र रूप ले लिया है. हालत यह है कि बाढ़ का पानी दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों तक पहुंच गया है.
नेपाल की नकहुआ नदी में पानी आने से दुधवा के अधिकांश हिस्से में जलभराव हो गया है. यही नहीं घनी आबादी और पलिया के निचले इलाकों मे भी बाढ जैसी हालत पैदा हो गई है। 
वहीं वन्यजीवों को जान बचाने के लिए जंगल के बाहर भागना पड़ रहा है. जंगल के अंदर खाने का संकट हो गया है. दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन अलर्ट हो गया है. तीन फीट बाढ़ के पानी में वन कर्मी गश्त कर रहे हैं.
बारिश और नदियों का कहर वन्यजीवों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है. बाढ़ के कारण जलभराव होने से जंगल क्षेत्र में पेट्रोलिंग में भी दिक्कत आ रही है. शाकाहारी वन्यजीवों के लिए चारे की समस्या पैदा हो गई है. वहीं बाघ और तेंदुआ को भोजन तलाशना मुश्किल पड़ रहा है."

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