सील होने के बाद भी धड़ल्ले से चल रहा 'न्यू जन सेवा हॉस्पिटल सीएचसी अधीक्षक के संरक्षण में गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़
लखीमपुर खीरी Aug 23, 2026 at 06:45 PM , 21मितौली खीरी।उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहाँ एक तरफ बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे कर रही है, वहीं लखीमपुर-खीरी के मितौली क्षेत्र से विभागीय मिलीभगत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ सील किए जाने के बावजूद 'न्यू जन सेवा हॉस्पिटल' खुलेआम संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मितौली के अधीक्षक का सीधा संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते यह 'मौत का अड्डा' बेखौफ चल रहा है।"हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता संचालक का रौब,अस्पताल के संचालक अभिषेक दीक्षित का क्षेत्र में जबरदस्त रसूख है। सूत्रों के मुताबिक, संचालक खुलेआम धौंस जमाते हुए कहता है कि "कोई भी कुछ भी कर ले, हमारे संबंध डायरेक्ट अधीक्षक से हैं, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इसी रसूख और विभागीय सांठगांठ के चलते प्रशासनिक कार्रवाई महज कागजों तक सिमट कर रह गई है।सील है तो कैसे हो रहे ऑपरेशन, अधीक्षक का गोल-मोल जवाब,जब इस गंभीर मामले को लेकर अधीक्षक से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह हॉस्पिटल पहले ही सील किया जा चुका है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर अस्पताल वाकई सील है, तो उसकी सील तोड़कर भीतर धड़ल्ले से ऑपरेशन और डिलीवरी कैसे की जा रही हैं।स्वास्थ्य विभाग की यह चुप्पी और ढुलमुल रवैया सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।बिना डिग्री के झोलाछाप कर रहे बड़े ऑपरेशन और डिलीवरी,अस्पताल के भीतर का सच बेहद खौफनाक है। यहाँ गरीब और लाचार मरीजों की जान पूरी तरह जोखिम में है,अल्पिका वर्मा बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के, यह महिला खुलेआम नॉर्मल डिलीवरी और प्रसूति का काम कर रही है।संजय दीक्षित,बिना योग्य डिग्री या किसी विशेषज्ञता के, यह व्यक्ति मरीजों के बड़े-बड़े ऑपरेशन (सर्जरी) अंजाम दे रहा है।मजदूर और गरीब परिवारों से मोटी रकम वसूलकर, बिना योग्य डॉक्टरों के यह अस्पताल लोगों की जिंदगी के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहा है।जनता में भारी आक्रोश, बड़े हादसे का इंतजार,इस अवैध गोरखधंधे को लेकर मितौली क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठा है। स्थानीय लोगों को डर है कि अगर जल्द ही इस फर्जी अस्पताल पर ताला नहीं लटका और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यहाँ कभी भी किसी मरीज की जान जा सकती है।अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन गहरी नींद से जागते हैं या फिर अधीक्षक की छत्रछाया में यह मौत का खेल यूँ ही चलता रहेगा।






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