SC/ST एक्ट में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: केवल जातिसूचक शब्द बोलना अपने आप में अपराध नहीं
लखीमपुर खीरी Aug 21, 2026 at 03:55 PM , 1**प्रयागराज।** इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किए जाने से अपने आप SC/ST एक्ट के तहत अपराध साबित नहीं हो जाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में अपराध के आवश्यक तत्वों और आरोपी की मंशा को भी प्रथम दृष्टया स्थापित करना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान ‘चमार’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कहा कि केवल इस शब्द का इस्तेमाल अपने आप में अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह दिखाना होगा कि संबंधित व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करने के स्पष्ट इरादे से ऐसा शब्द कहा गया था।
### जाति के आधार पर अपमानित करने की मंशा साबित करना जरूरी
अदालत ने कहा कि SC/ST एक्ट के प्रावधानों को लागू करने के लिए आरोप में अपराध के जरूरी तत्वों का प्रथम दृष्टया मौजूद होना आवश्यक है। महज जातिसूचक शब्द के इस्तेमाल के आधार पर किसी व्यक्ति को मुकदमे का सामना करने के लिए समन जारी नहीं किया जा सकता, जब तक आरोपों से कानून के तहत अपराध के आवश्यक तत्व स्पष्ट न हों।
हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि किसी शब्द का इस्तेमाल किस संदर्भ में किया गया, उसके पीछे आरोपी की मंशा क्या थी और क्या उसका उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर सार्वजनिक रूप से अपमानित करना था—इन सभी पहलुओं का परीक्षण जरूरी है।
### निचली अदालत का समन आदेश रद्द
मामले में हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपों के आधार पर SC/ST एक्ट के तहत अपराध के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होते हैं। ऐसे में निचली अदालत द्वारा आरोपी को ट्रायल का सामना करने के लिए जारी किया गया समन आदेश उचित नहीं था।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के समन आदेश को रद्द कर दिया। अदालत की इस टिप्पणी को SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों में आरोपों की प्रकृति, संदर्भ और आरोपी की कथित मंशा के महत्व को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
हालांकि, ऐसे मामलों में प्रत्येक प्रकरण के तथ्य और परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कभी भी SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं हो सकता; यदि कानून में निर्धारित अन्य आवश्यक तत्व और जाति के आधार पर अपमानित करने की मंशा स्थापित होती है, तो संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं।































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