*विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वालों को दी गई श्रद्धांजलि*
लखीमपुर खीरी Aug 14, 2026 at 06:27 PM , 12लखीमपुर। नगर के प्रतिष्ठित संस्थान विद्या भारती विद्यालय पण्डित दीन दयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज (यू०पी० बोर्ड) में आज 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' का आयोजन अत्यंत गरिमापूर्ण एवं भावुक माहौल में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1947 के विभाजन की भीषण त्रासदी में प्राण गंवाने वाले, बेघर हुए तथा अमानवीय यातनाएं सहने वाले लाखों देशवासियों के अनगिनत बलिदान व संघर्ष को नमन करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री जयराम जी (पूर्व सैनिक, भारतीय थल सेना), मुख्य वक्ता श्री राजेश दीक्षित जी (वरिष्ठ समाजसेवी) एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ० योगेन्द्र प्रताप सिंह जी द्वारा मां सरस्वती व पं० दीन दयाल उपाध्याय जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ समाजसेवी श्री राजेश दीक्षित जी ने अपने विस्तृत एवं ओजस्वी संबोधन में 1947 के विभाजन के ऐतिहासिक एवं मानवीय पक्षों पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने कहा: "15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता तो मिली, लेकिन इसके साथ ही विभाजन का वह दंश भी मिला जिसने करोड़ों परिवारों को रातों-रात बेघर कर दिया। डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों का विस्थापन और लाखों बेगुनाह लोगों की जान जाना मानव इतिहास की सबसे दर्दनाक और भयावह त्रासदियों में से एक है। विभाजन केवल भूमि की सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक सांझ, परिवारों और मानवीय संवेदनाओं का क्रूर बंटवारा था।" उन्होंने आगे बताया "आज 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मनाने का मूल उद्देश्य किसी पुरानी कड़वाहट या नफरत को हरा करना नहीं है, बल्कि उस इतिहास से सीख लेकर समाज में फैली वैमनस्यता, अविश्वास और भेदभाव के जहर को जड़ से समाप्त करना है। यदि हम अपने इतिहास के इस काले पन्ने को भूल जाएंगे, तो हम राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव के प्रति असावधान हो जाएंगे। हमारी युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि भारत की स्वतंत्रता और अखंडता की कीमत कितनी भारी रही है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर 'राष्ट्र प्रथम' (Nation First) की भावना को आत्मसात करें और देश की एकता व संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें।" मुख्य अतिथि पूर्व सैनिक श्री जयराम जी (भारतीय थल सेना) ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्र रक्षा और एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाएं और आंतरिक सुरक्षा तभी मजबूत रह सकती हैं जब देश के नागरिक आपस में संगठित और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हों। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ० योगेन्द्र प्रताप सिंह जी ने अतिथियों का परिचय कराया और कहा कि ऐसे आयोजनों से भावी पीढ़ी को देश के इतिहास की जमीनी सच्चाई और राष्ट्रीय एकता के महत्व का बोध होता है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रथम सहायक वरिष्ठ आचार्य श्री राजेन्द्र प्रसाद ओझा जी ने सभी सम्मानित अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थितजनों का धन्यवाद व हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्य, दीदी जी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।































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