पौराणिक देवकली तीर्थ में नागपंचमी को होगा कालसर्प योग शांति महायज्ञ

लखीमपुर खीरी , 14

17 अगस्त को श्रावण शुक्ल पंचमी पर सामूहिक अनुष्ठान, दूर-दराज से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना


17 अगस्त को अद्भुत संयोग में मनाई जाएगी नागपंचमी!


लखीमपुर-खीरी।जिला लखीमपुर खीरी के पवित्र एवं पौराणिक तीर्थस्थल देवकली में आगामी 17 अगस्त 2026, सोमवार को श्रावण शुक्ल पंचमी अर्थात श्रीनाग पंचमी के अवसर पर सामूहिक कालसर्प योग शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दे रहा है आयोजक महन्त प्रमोद जी महाराज, श्रीमती चन्द्रकला आश्रम एवं संस्कृत विद्यापीठ, देवकली तीर्थस्थल कालसर्प योग को ज्योतिषीय मान्यता से जोड़कर देखा जाता है। उनके अनुसार इसकी शांति के लिए सामूहिक अनुष्ठान एवं धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इसी उद्देश्य से देवकली के पवित्र परिसर में महायज्ञ का आयोजन प्रस्तावित है।
बताया गया कि ज्योतिषीय मान्यताओं में कालसर्प योग के विभिन्न रूप बताए जाते हैं। आयोजकों का कहना है कि जिन जातकों की जन्मकुंडली में इस प्रकार का दोष बताया जाता है, वे मानसिक तनाव अथवा जीवन की विभिन्न परेशानियों को लेकर शांति अनुष्ठान की ओर रुख करते हैं। महायज्ञ के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में पूजा-अर्चना का अवसर मिलेगा।

पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है देवकली तीर्थ!


जनपद खीरी के देवकली तीर्थस्थल को स्थानीय धार्मिक परंपराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यह स्थल राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ से जुड़ी ऐतिहासिक-पौराणिक धरोहरों में शामिल है। यही वजह है कि नाग पंचमी के अवसर पर यहां धार्मिक आयोजन का विशेष महत्व माना जाता है।
देवकली को लेकर श्रद्धालुओं में यह भी मान्यता है कि यहां विभिन्न पवित्र तीर्थों के जल तथा धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित द्वादश ज्योतिर्लिंगों की धार्मिक महत्ता से जुड़े संदर्भ भी आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को बताए जाएंगे।

श्रद्धालुओं से पहुंचने की अपील!


आयोजकों ने कालसर्प योग शांति के लिए अनुष्ठान में शामिल होने के इच्छुक श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर आयोजन में भाग लेने की अपील की है। महायज्ञ के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार किए जाने की जानकारी दी गई है।

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