दुधवा में पाए जाने वाले तेंदुओं की संख्या हो रही कम, बफर जोन और खेतो में तेंदुए ही तेंदुए,

लखीमपुर खीरी , 24

 "अवैध शिकार प्राकृतिक आवास की कमी,मानव वन्य जीव संघर्ष,बफर जोन और खेतो में तेंदुए ही तेंदुए"
विश्वकांत त्रिपाठी 

पलिया कलां लखीमपुर खीरी।दुधवा नेशनल पार्क में तेंदुए पाये जाते हैं। तेंदुआ बिल्ली प्रजाति के सदस्यों में आता है। मादा एक बार में 2 शावकों को जन्म देती है। तेंदुए शावक 3-4 वर्ष में वयस्क हो जाते है।सक्षम प्राणी तेंदुआ अपने आपको विभिन्न परिस्थितियों के अनुकूल बनाने वाला प्राणी है। हर परिस्थिति में रहने वाला सक्षम प्राणी है। तेंदुए की लम्बाई लगभग 2.15 मीटर तक पायी जाती है। इसका वजन 40 किलोग्राम से68 किलोग्राम तक होता है। तेंदुए का निवास – तेंदुआ पतझड़ी वन, झाड़ी वाले वन, सदाबहार वन, खुले मैदान तथा गांवों के निकट वर्ती क्षेत्रों में भी रहता हैं। तेंदुए की विशेषता है कि वह पेड़ों पर भी चढ़ जाता है।तेंदुए का भोजन – तेंदुआ बाघ के क्षेत्र में रहकर भी छोटे-छोटे जानवरों का शिकार कर लेता है। शिकार करने में वह पालतू पशु ,हिरण, बन्दर, सेही, खरगोश आदि छोटे-छोटे जानवरों का शिकार कर लेता है। कुछ तेंदुए जो जंगल के नजदीक सटे गांवों में रहते है वे प्रायः रात में ग्रामीणों के पालतू पशु जैसे बछडे, बकरी, भेड़ तथा कुत्ते को अपना भोजन बना लेते हैं।संख्या में कमी के कारण- वर्तमान में तेंदुए की संख्या काफी कम हो रही है। इसके मुख्य कारण अवैध शिकार प्राकृतिक आवास की कमी, ,मानव वन्य जीव संघर्ष भी है।

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