निजी घर से पिकप पर यूरिया लोड होने का वीडियो वायरल। लाखुन बी-पैक्स समिति पर फिर उठे सवाल।
लखीमपुर खीरी Jul 19, 2026 at 08:55 PM , 86..किसानों ने लगाए खाद वितरण में अनियमितता और कालाबाजारी के आरोप।
तीन सप्ताह पहले उठे मामले की जांच पर भी सवाल।
समिति सचिव बोले- वीडियो पुराना समिति से खाद देने का सवाल ही नहीं।
धौरहरा खीरी।
तहसील धौरहरा क्षेत्र के ईसानगर क्षेत्र से 18 जुलाई 2026 से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।वायरल वीडियो को बी-पैक्स लाखुन समिति से जोड़कर देखा जा रहा है।हालांकि, मीडिया संस्थान वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
वायरल वीडियो में एक निजी घर से पिकअप/डीसीएम वाहन पर यूरिया खाद की बोरियां दिन दहाड़े लोड होती दिखाई दे रही हैं।वीडियो में मौजूद एक व्यक्ति ड्राइवर से कहते हुए सुनाई देता है, "ड्राइवर देख लो, कितनी पहुंच गई है," जिस पर 11 /13 बोरी पहुंचने की बात कही जाती है।
वहीं,नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कई किसानों ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां पहली बार नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि गांव में समिति होने के बावजूद उन्हें निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। किसानों का आरोप है कि समिति पर खाद लेने जाने पर कर्मचारियों द्वारा कभी स्टॉक तो कभी अन्य कारण बताकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है और अगली बार आने को कहा जाता है।
एक किसान ने आरोप लगाया कि यदि कोई किसान ज्यादा सवाल करता है तो वहां मौजूद कर्मचारी उसकी पासबुक तक फेंक देते हैं। किसानों का कहना है कि ऐसी स्थिति में उन्हें मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ती है।
गौरतलब है कि कुछ सप्ताह पहले भी लाखुन समिति पर सिंगावर समिति की खाद उतरने का मामला चर्चा में आया था। उस समय अधिकारियों ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।अब लगभग तीन सप्ताह बीतने के बाद भी न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही किसी कर्मचारी पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच अभी तक पूरी नहीं हुई या फिर कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
अब निजी घर से डीसीएम पर खाद लोड होने का वायरल वीडियो सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है। यदि वीडियो में दिख रही खाद और उसके परिवहन से जुड़ी परिस्थितियां सही पाई जाती हैं तो यह गंभीर जांच का विषय हो सकता है। किसानों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी सामने आती है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए,ताकि किसानों को समय पर और निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध हो सके।
एडीसीओ सहकारिता जुल्फिकार अली ने बताया मामला संज्ञान आने के बाद जांच की तों पता चला कि गन्ना ऐरा समिति से खाद लाई गई, हमारे यहां से संबंधित मामला नहीं है।






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