हैदराबाद थाने में चोरों का ‘गुड गवर्नेंस’, 4 महीने में 7 वारदात, पुलिस एफआईआर तक लिखने में ‘व्यस्त’!
लखीमपुर खीरी Jul 01, 2026 at 06:03 PM , 67₹42 लाख से अधिक की ज्वेलरी से लेकर भैंस-चारपाई तक सब ले गए चोर, एसपी की निगरानी भी बेअसर,
गोला गोकर्णनाथ खीरी, थाना हैदराबाद क्षेत्र इन दिनों चोरों के लिए ‘सेफ जोन’ बना हुआ है। बीते चार महीनों में आधा दर्जन से ज्यादा ताबड़तोड़ चोरियों ने पुलिस की कार्यशैली की पोल खोल दी है। हालत ये है कि ₹42 लाख से अधिक की बड़ी चोरी से लेकर गरीब की चारपाई तक, चोर सब उठा ले गए और पुलिस सिर्फ तहरीर लेकर ‘जांच जारी है’ का रटा-रटाया भरोसा देती रही।
ग्रामीणों में दहशत इस कदर है कि लोग अब रात जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। सवाल ये कि जब एसपी साहब की निगरानी में हुई ₹42 लाख से अधिक की चोरी का एक महीने में खुलासा नहीं हो पाया, तो आम आदमी की सुनवाई कहां होगी?
केस-1 और 2: एक ही रात, दो वारदात, FIR नदारद
8 मार्च की रात ग्राम सुहेला चोरों का ‘टारगेट’ बना। सबसे पहले अक्षय अवस्थी की किराना दुकान की पिछली दीवार में सेंध लगाकर चोर 6 बोरी आरेंज चावल, 1 बोरी डायमंड चावल, 8 पेटी रिफाइंड तेल और 5 किलो काजू समेत ₹30 हजार का माल समेट ले गए।
उसी रात चंद कदम दूर कमल गुप्ता उर्फ चिकू के गन्ना कोल्हू परिसर को भी खंगाल दिया। अल्टीनेटर उठाया, गोदाम का शटर तोड़ा और खाद की 15 बोरी, 6 चारपाई तक बांध ले गए।
हैरानी की बात: दोनों पीड़ितों ने 9 मार्च को ही तहरीर दे दी थी, लेकिन 3 महीने 21 दिन बीत गए, पुलिस ने आज तक FIR लिखना मुनासिब नहीं समझा। सवाल उठता है- तहरीर रद्दी की टोकरी में गई या साहब की टेबल की फाइल में दब गई?
केस-3: SP की निगरानी में ₹42 लाख की चोरी, पुलिस खाली हाथ
21 मई की रात गांव सेमरई में कोटेदार चंद्र प्रकाश मिश्रा के घर चोरों ने ‘जैकपॉट’ मारा। ₹42 लाख से ज्यादा के सोने-चांदी के जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। मामला हाई-प्रोफाइल हुआ तो पुलिस अधीक्षक ने खुद निगरानी शुरू की। नतीजा? एक महीने से ज्यादा बीत गया, चोर तो दूर, चोरी की एक चूड़ी तक बरामद नहीं हुई।
केस-4 और 5: किसानों की ‘लक्ष्मी’ यानी भैंस भी सुरक्षित नहीं
23 जून को ग्राम बगहा निवासी अजय कुमार वर्मा के पशुबाड़े से ₹2.5 लाख की 3 दुधारू भैंस चोरी हो गईं। FIR तो लिखी गई, लेकिन 6 दिन में पुलिस को भैंस की पूंछ तक नहीं मिली।
इससे पहले 23 जून को ग्राम चमरपुरवा में प्रेम चंद के यहां से भी ढेड़ लाख की 2 दुधारू पशु चोर खोल ले गए। इस मामले में एफआईआर लिखी गई लेकिन 6 दिन में पुलिस को भैंस की पूंछ तक नहीं मिली।
केस-6: सरकारी दफ्तर में चोरों का ‘डिजिटल इंडिया’
18 जून की रात चोरों ने ग्राम बघमरा स्थित B पैक्स केंद्र जडौरा सहकारी समिति को ही ‘खाली’ कर दिया। मेन गेट का ताला तोड़कर इन्वर्टर, बैटरी, सीलिंग फैन, एलसीडी, डेस्कटॉप कंप्यूटर, प्रिंटर और ई-पास मशीन समेत पूरा इलेक्ट्रॉनिक सामान उठा ले गए। सचिव मदन लाल भारती की तहरीर पर मुकदमा तो लिखा गया, पर 11 दिन बाद भी पुलिस ‘साइबर चोर’ तो क्या, लोकल कबाड़ी तक नहीं ढूंढ पाई।
केस-7: मेला देखने गए, बाइक गंवाकर लौटे, FIR भी नहीं मिली
14 जून को ग्राम द्वारिकागंज के कमलेश वर्मा खरागापुर मेला देखने एच एफ डीलक्स बाइक से गए थे। मेला देखा, लौटे तो बाइक गायब। 15 दिन बीत गए, थाने के चक्कर काट रहे हैं, पर पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की।
ग्रामीणों का गुस्सा: ‘एफ आईआर नहीं तो कार्रवाई क्या खाक होगी’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस तहरीर लेकर ‘देखते हैं, करते हैं’ बोलकर टरका देती है। आधे मामलों में तो मुकदमा ही नहीं लिखा जाता। जब रिपोर्ट ही दर्ज नहीं होगी तो चोर पकड़ेंगे कैसे?
लोगों ने सवाल उठाया कि जब किराना, कोल्हू, कोटेदार, सहकारी समिति और किसान कोई सुरक्षित नहीं, तो पुलिस की गश्त कहां है? रात में सड़कों पर सन्नाटा है और चोरों के हौसले सातवें आसमान पर।






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