**परिवहन प्रशिक्षण : चालक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना के नियमों में बदलाव**

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**अब चालक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना के लिए जिलाधिकारी के समक्ष करना होगा आवेदन**
 
**लखनऊ।** प्रदेश में चालक प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना को लेकर राज्य परिवहन प्राधिकरण ने प्रक्रिया में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब चालक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना के लिए **लेटर ऑफ इन्टेन्ट (Letter of Intent) जारी करने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।**
 
पूर्व में प्रदेश के 17 जनपदों—**वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या, आजमगढ़, देवीपाटन-गोण्डा, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, झांसी, अलीगढ़, मथुरा, चित्रकूटधाम-बांदा तथा रायबरेली**—को छोड़कर अन्य जनपदों में चालक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना के लिए लेटर ऑफ इन्टेन्ट निर्गत किए जाने हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए थे। अब इस व्यवस्था में संशोधन करते हुए लेटर ऑफ इन्टेन्ट जारी करने की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है।
 
राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव ने बताया कि **अब मानकों के अनुसार स्थापित चालक प्रशिक्षण केन्द्र के प्रत्यायन (Accreditation) के लिए प्रार्थना पत्र के अतिरिक्त केन्द्र की स्थापना हेतु राज्य परिवहन प्राधिकरण के समक्ष कोई अलग आवेदन नहीं किया जाएगा।**
 
उन्होंने बताया कि प्रत्यायन प्राप्त चालक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना एवं उसके रख-रखाव के इच्छुक आवेदक को अपना प्रस्ताव **विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)** के साथ संबंधित जनपद के **जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।** यह DPR किसी **नेशनल स्किल काउंसिल से अनुमोदित** होना आवश्यक होगा।
 
जिलाधिकारी द्वारा प्रस्ताव पर संस्तुति किए जाने के बाद ही आवेदक **फॉर्म-3बी में अंडरटेकिंग प्राप्त करने के लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण के समक्ष आवेदन** कर सकेगा।
 
इस संशोधन से चालक प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और जिला स्तर पर परीक्षण एवं संस्तुति आधारित बनाया गया है।

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