लखीमपुर के लोक निर्माण विभाग में सूचना का घोटाला उजागर: 11 लाख के ठेके पर दोहरे मापदण्ड कानून की धज्जियां: धारा 6(3) और 7(9) का खुला उल्लंघन
लखीमपुर खीरी Jun 12, 2026 at 06:55 PM , 1(सुनहरा)
लखीमपुर-खीरी। लोक निर्माण विभाग में सूचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवहेलना का मामला एक ही जनसूचना आवेदन पर विभाग के दो उत्तरदायी खण्डों द्वारा परस्पर विरोधाभासी, तथ्यहीन एवं विधि-विरुद्ध उत्तर प्रेषित कर 11 लाख 31 हजार 990 रुपये की शासकीय धनराशि से सम्पादित कार्य का विवरण छिपाने का कुत्सित प्रयास किया गया है। व्यथित आवेदिका ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष दो पृथक अपील योजित कर दोषी लोक सूचना अधिकारियों के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि दिनांक 12 मई 2026 को आवेदिका द्वारा मेसर्स हिन्दुस्तान कान्ट्रैक्टर्स एंड सप्लायर्स द्वारा सम्पादित निर्माण कार्यों से संबंधित मस्टर रोल, श्रमिक भुगतान विवरण, बैंक अभिलेख सहित 8 बिन्दुओं पर सत्यापित अभिलेखों की मांग की गई थी। प्रान्तीय खण्ड के लोक सूचना अधिकारी ने पत्रांक 1634 दिनांक 02 जून 2026 द्वारा स्वयं स्वीकार किया कि "बिन्दु-3 को छोड़कर शेष बिन्दुओं की सूचना उपलब्ध कराई जाए", जिससे स्पष्ट है कि बिन्दु-3 का अभिलेख कार्यालय में संधारित है। किन्तु आश्चर्यजनक रूप से मात्र 7 दिवस उपरान्त पत्रांक 1741 दिनांक 09 जून 2026 द्वारा "बिन्दु-3 पर शून्य निविदा" अंकित कर असत्य कथन किया गया। एक ही कार्यालय द्वारा 7 दिवस में परस्पर विरोधी कथन सूचना को जानबूझकर छिपाने का द्योतक है। वहीं निर्माण खण्ड-1 के लोक सूचना अधिकारी ने पत्रांक 820 दिनांक 10 जून 2026 द्वारा "मेट का नाम उल्लेखित न होने" का निराधार तर्क देकर सूचना प्रदान करने से इंकार कर दिया। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(2) स्पष्ट रूप से उद्घोषित करती है कि आवेदक से सूचना मांगने का कारण नहीं पूछा जाएगा। इसी खण्ड द्वारा अनुबंध संख्या 09/ई०३०/2024-25 के अन्तर्गत 11,31,990 रुपये का कार्य सम्पादित होना स्वीकार किया गया, परन्तु श्रमिकों के मस्टर रोल एवं भुगतान प्रमाणक उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया गया। यह कृत्य धारा 7(1) एवं 7(9) का घोर उल्लंघन है।
प्रान्तीय खण्ड द्वारा बिन्दु 1,2,4,6 की सूचना "निर्माण खण्ड-1 से संबंधित" कहकर पल्ला झाड़ लिया गया, किन्तु धारा 6(3) के अन्तर्गत आवेदन को 5 दिवस में अन्तरित करने का वैधानिक दायित्व नहीं निभाया गया। उल्लेखनीय है कि दोनों खण्ड एक ही अधीक्षण अभियन्ता, लखीमपुर मण्डल के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। बिन्दु 5 व 7 की सत्यापित प्रति न देकर "वेबसाइट पर उपलब्ध" कहकर टालना धारा 7(9) का उल्लंघन है।आवेदिका द्वारा दिनांक 04 जून 2026 को पंजीकृत डाक से पुनः स्मरण कराए जाने के उपरान्त भी असत्य उत्तर प्रेषित किया गया। अतः आवेदिका ने दिनांक 12 जून 2026 को दोनों लोक सूचना अधिकारियों के विरुद्ध पृथक-पृथक प्रथम अपील योजित कर सम्पूर्ण अभिलेख 15 कार्य दिवस में निःशुल्क उपलब्ध कराने, धारा 20(1) के अन्तर्गत 25,000 रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित करने एवं धारा 20(2) के अन्तर्गत विभागीय कार्रवाई की मांग की है। प्रश्न यह है कि 11 लाख से अधिक की शासकीय धनराशि के व्यय में मस्टर रोल एवं श्रमिक भुगतान का विवरण क्यों छिपाया जा रहा है? क्या अभिलेखों में कूटरचित श्रमिक दर्शाकर धन का अपयोजन किया गया है? प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय पर जनमानस की दृष्टि टिकी है। आवेदिका ने कहा कि "सूचना से वंचित करने का प्रत्येक प्रयास किया गया। आवश्यकता पड़ी तो राज्य सूचना आयोग एवं माननीय उच्च न्यायालय तक विधिक संघर्ष किया जाएगा।































Comments