आरटीआई का मखौल वन विभाग नहीं दे रहा पेड़ों के कटान की जानकारी
लखीमपुर खीरी Jun 10, 2026 at 07:05 PM , 5लखीमपुर खीरी।जनपद के मोहम्मदी वन प्रभाग में नियमों को ताक पर रखकर हो रहे पेड़ों के कटान और ठेकेदारों के पंजीकरण का मामला गर्माता जा रहा है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को दबाकर बैठे वन विभाग के अधिकारियों के रवैये से परेशान होकर अब आवेदक ने राज्य सूचना आयोग, लखनऊ का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। आरोप है कि जनपद में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 पूरी तरह से दिव्यांग बनकर रह गया है और वन विभाग के अधिकारियों के लिए इसके कोई मायने नहीं हैं।
किशोर नगर कॉलोनी पिपरिया सीतापुर रोड निवासी अमर पाल सिंह पुत्र कमलेश कुमार सिंह ने मोहम्मदी के प्रभागीय वनाधिकारी अखिलेश सिंह को सूचना के अधिकार के तहत एक प्रार्थना पत्र भेजा था। इसके साथ उन्होंने नियमानुसार 10 रुपये का भारतीय मुद्रा संख्या 38 एच 994904 भी संलग्न किया था। आवेदक ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर प्रमाणित जानकारी मांगी थी,परमिट के नियम वन विभाग द्वारा पेड़ काटने के लिए जारी किए जाने वाले परमिट के नियम और शर्तों की प्रमाणित प्रति।ठेकेदारों का पंजीकरण, पेड़ काटने वाले ठेकेदार किस श्रेणी के पेड़ काट सकते हैं,क्या उनका वन विभाग में पंजीकृत होना अनिवार्य है और कटान के दौरान उन्हें किन नियमों का पालन करना होता है,सेमराजानीपुर कटान का विवरण,मोहम्मदी तहसील के पसगवां विकास खंड की ग्राम पंचायत सेमराजानीपुर में हाल ही में दिए गए पेड़ कटान के परमिट का आधार क्या था,क्या काटे गए आम के पेड़ हरे और फलदार थे,आवेदक ने इस कटान से संबंधित परमिट की कॉपी और मौके की तस्वीरों फोटोग्राफ्स की भी मांग की थी।
अधिकारियों ने फेरा मुंह अपील भी बेअसर
सच्चाई सामने आने के डर से वन विभाग के अधिकारी आवेदकों को जानकारी देने में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। आवेदक अमर पाल सिंह ने इस संबंध में पहली चिट्ठी 17 जनवरी 2026 को भेजी थी। निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई जवाब न मिलने पर आवेदक ने 19 फरवरी 2026 को प्रथम विभागीय अपील भी दायर की। दो-दो बार पत्र लिखे जाने के बावजूद प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से कोई संतोषजनक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।स्थानीय लोगों और आवेदक का आरोप है कि मोहम्मदी क्षेत्र के जिम्मेदार वन अधिकारी सूचना अधिकार अधिनियम का खुलेआम मजाक उड़ा रहे हैं। जब क्षेत्रीय कार्यालय से ही न्याय नहीं मिला, तो अब आवेदक ने थक-हारकर राज्य सूचना आयोग, लखनऊ को पत्र भेजकर सूचनाएं उपलब्ध कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करने का फैसला किया है। इस मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और पेड़ों के अवैध कटान की आशंकाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।































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