बिजली विभाग की लापरवाही से दो संविदाकर्मियों की मौत अधिवक्ता महासंघ ने की एफआईआर और मुआवजे की मांग
लखीमपुर खीरी Jun 10, 2026 at 07:37 PM , 2लखीमपुर-खीरी:उत्तर प्रदेश अधिवक्ता महासंघ ने लखीमपुर-खीरी जिले में बिजली विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण एक महीने के भीतर दो संविदाकर्मियों की करंट लगने से हुई मौत पर गहरा आक्रोश जताया है। महासंघ ने इस मामले में जिला अधिकारी (डीएम) को एक मांग पत्र सौंपकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।अधिवक्ता महासंघ द्वारा सौंपे गए पत्र के अनुसार, जिले में बिजली विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण दो अलग-अलग घटनाओं में संविदाकर्मियों की जान गई है पहली घटना थाना नीमगांव के ग्राम रायपुर में संविदाकर्मी महेश कुमार गुप्ता पोल पर काम कर रहे थे। इसी दौरान बिना किसी पूर्व सूचना के लाइन में विद्युत प्रवाह चालू कर दिया गया, जिससे करंट लगने से उनकी मौत हो गई।दूसरी घटना इस हादसे से सबक न लेते हुए विभाग ने दोबारा वैसी ही लापरवाही की। थाना उचौलिया के ग्राम लोधियापुर मजरा नयागाँव जाट में शटडाउन वापस लिए बिना ही हाईटेंशन लाइन की आपूर्ति शुरू कर दी गई। इसके कारण काम कर रहे दूसरे संविदाकर्मी अतुल मिश्रा की भी दर्दनाक मौत हो गई।महासंघ ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर बेहद गंभीर और संवेदनहीन आरोप लगाए हैं। पत्र में कहा गया है कि इन हादसों के बाद विभाग अपनी कमियों को छुपाने के लिए मानवता को ताक पर रख देता है। अधिकारी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए मृत संविदाकर्मियों को घटनास्थल पर 'अनाधिकृत व्यक्ति' साबित करने का प्रयास करते हैं, जो कि बेहद निंदनीय है।
अधिवक्ता महासंघ की प्रमुख मांगें
उत्तर प्रदेश अधिवक्ता महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष अजय कुमार शुक्ल, प्रांतीय महासचिव नरेन्द्र कुमार वर्मा और प्रांतीय उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह सूर्यवंशी ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं एफआईआर और गिरफ्तारी, दोनों संविदाकर्मियों की मौत के जिम्मेदार संबंधित अधिशाषी अभियंता, एसडीओ, जेई तथा अन्य दोषी कर्मचारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए,लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच और एक्शन सुनिश्चित हो।मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए और पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल देने के लिए 1-1 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति (मुआवजा) राशि का भुगतान किया जाए।महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर मामले में प्रशासन द्वारा जल्द ही आवश्यक और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे के कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।































Comments