*सदर तहसील में EWS प्रमाणपत्र बना जी का जंजाल, हफ्तों भटक रहे युवा*

लखीमपुर खीरी , 21

*एक हस्ताक्षर के लिए लगाने पड़ रहे चक्कर, छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में*  

*लखीमपुर खीरी।* सूबे की सरकार भले ही जनसेवाओं को पारदर्शी और त्वरित बनाने के दावे कर रही हो, लेकिन सदर तहसील में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का प्रमाणपत्र बनवाना आम जनता और युवाओं के लिए जी का जंजाल बन चुका है।  
 तहसील परिसर में आवेदन जमा करने के लिए कोई सुव्यवस्थित काउंटर या विंडो चालू नहीं है। इसके चलते आवेदकों को अपनी फाइल हाथ में लेकर लेखपाल, कानूनगो, नायब तहसीलदार और तहसीलदार के कमरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिम्मेदार अधिकारियों के समय पर सीट पर न मिलने से आवेदकों में भारी आक्रोश है।  
 आवेदकों का आरोप है कि वे सुबह से शाम तक तहसील में भूखे-प्यासे इंतजार करते हैं, फिर भी काम नहीं होता। अधिकारी अपनी सीट से नदारद रहते हैं और फोन करने पर कॉल तक रिसीव नहीं की जाती। इस लचर व्यवस्था के कारण तहसील परिसर में सिर्फ मायूसी और समय की बर्बादी ही दिख रही है।  
 EWS प्रमाणपत्र समय पर न बनने के कारण सबसे बड़ा नुकसान छात्र-छात्राओं और बेरोजगार युवाओं को हो रहा है। प्रमाणपत्र के अभाव में कई छात्र समय पर आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। सरकारी नौकरियों के फॉर्म भरने और आरक्षण का लाभ लेने से युवा वंचित हो रहे हैं। पात्र होने के बाद भी गरीब परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।   एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त निर्देश है कि जनता से जुड़े कार्यों में लापरवाही न बरती जाए और सेवाएं समयबद्ध तरीके से दी जाएं। दूसरी तरफ, सदर तहसील के अधिकारी इन निर्देशों को ठेंगा दिखाकर जनता को प्रताड़ित कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जिले के उच्च अधिकारी इस अव्यवस्था का संज्ञान लेकर लापरवाह कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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