*बाँकेगंज के मनप्रियम का IISc बेंगलुरु में चयन, मैथमेटिकल साइंस में करेंगे शोध*
लखीमपुर खीरी May 30, 2026 at 05:35 PM , 31*IIT JAM में 45वीं और CUET-PG में 4वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान*
*पलिया कलां, लखीमपुर खीरी।* बाँकेगंज निवासी और लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र मनप्रियम ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परचम फहराते हुए जनपद का मान बढ़ाया है। देश के प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु यानी IISc में एकीकृत शोध के लिए उनका चयन हुआ है। वे यहां मैथमेटिकल साइंस विषय में अध्ययन और शोध करेंगे।
*दोनों राष्ट्रीय परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन:* लखनऊ विश्वविद्यालय के बीएससी छठवें सेमेस्टर के छात्र मनप्रियम ने पिछले माह IIT JAM परीक्षा में ऑल इंडिया 45वीं रैंक हासिल की थी। साथ ही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट पीजी में भी चौथी ऑल इंडिया रैंक हासिल कर इतिहास रचा था।
*18 मई को दिया था इंटरव्यू:* IIT JAM स्कोर के आधार पर मनप्रियम ने IISc बेंगलुरु में एकीकृत शोध के मैथमेटिकल साइंस पाठ्यक्रम के लिए 18 मई को साक्षात्कार दिया था। संस्थान ने साक्षात्कार में उन्हें सफल घोषित करते हुए ऑफर लेटर भेजा है।
*IIT कानपुर छोड़ IISc को दी प्राथमिकता:* यद्यपि मनप्रियम एक दिन पूर्व ही IIT कानपुर में मैथमैटिक्स मास्टर्स के लिए अपनी सीट लॉक कर चुके थे, लेकिन IISc का ऑफर लेटर मिलने के बाद उन्होंने एकीकृत शोध को प्राथमिकता देते हुए प्रवेश की तैयारी शुरू कर दी है।
*"IISc में प्रवेश सपना था":* मनप्रियम का कहना है कि IISc में प्रवेश प्राप्त करना उनका सपना था। राष्ट्रीय स्तर की दोनों परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता के बाद देश के शीर्षतम विज्ञान शिक्षा संस्थान में दाखिला मिलने से वे अत्यंत उत्साहित हैं।
*देश का नंबर-1 संस्थान:* 117 वर्ष पूर्व स्थापित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस अकादमिक और रिसर्च कैटेगरी अंतर्गत NIRF रैंकिंग में देश में पहले स्थान पर है। ग्लोबल रैंकिंग में भी यह संस्थान भारत में शीर्ष पर है। एकीकृत शोध के मैथमेटिकल साइंस पाठ्यक्रम में मात्र डेढ़ दर्जन प्रतिभाशाली विद्यार्थी ही प्रवेश पाते हैं।
*स्व-अध्ययन से मिली सफलता:* मनप्रियम ने यह सफलता स्व-अध्ययन से हासिल की है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों और माता-पिता को दिया है।
*परिवारिक पृष्ठभूमि:* मनप्रियम ग्राम स्टेशनपुरवा के निवासी स्व. प्रताप सिंह राठौर के पौत्र हैं। उनकी माता पंखुड़ी सिंह गृहिणी हैं और पिता यदुनाथ सिंह मुरारी किसान और रचनाधर्मी हैं। इस उपलब्धि पर समाज के गणमान्यजनों सहित शिक्षकों एवं सहपाठियों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।































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