मई के अंतिम सप्ताह में भी वाटर होलों तक नहीं पहुंचा वन विभाग का सरकारी पानी?

लखीमपुर खीरी , 58

(विश्वकांत त्रिपाठी/केके शुक्ला) 

पलिया कलां लखीमपुर खीरी। नॉर्थ खीरी का अजब गजब खेल मई के अंतिम सप्ताह में भी वाटर होलों तक नहीं पहुंचा वन विभाग का सरकारी पानी ? मझगई रेंज के कोबरहिया‌ वन‌ क्षेत्र स्थित कच्चा ताल और पक्का ताल के वाटर होल भीषण गर्मी में खाली, नहीं भराया एयर कंडीशनर में बैठे वनाधिकारियों ने जंगली अनबोले पशु पक्षियों के पीने के लिए पानी।
           मई- जून की तप्ती धूप तथा जेठ के महीने में सूखे वाटर होल वनाधिकारियों की खाऊ-कमाऊं नीति का शिकार हो रहे अन बोले जंगली पशु पक्षी प्यास से व्याकुल होकर बफर जोन मे पानी की आस में दर-दर भटककर असमय में काल कवलित हो रहे।
         मामला नॉर्थ खीरी की मझगई वन रेंज स्थित कोबरहिया वन बीट क्षेत्र का है, कोबरहिया वन क्षेत्र अंतर्गत स्थित क्षेत्र जनपद खीरी के नार्थ खीरी का हिस्सा है जहां वनो सहित वन्य जंतु जीव सुरक्षा के लिए दर्जनों कर्मचारियों का स्टाफ तथा प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये का बजट वन विभाग वन्य जन्तु सुरक्षा के नाम पर प्रदेश सरकार खर्च कर रही है किंतु बजट का चौथी आई हिस्सा भी कर्मचारी और अधिकारियों की को कमाऊ नीति के चलते वन्यजंतुओं तक नहीं पहुंच पा रहा ? यहां तक की जेठ की तप्ती धूप और गरम हवाओं के थपेडो से बचाव को बना अधिकारियों के हवा हवाई दवे इस बात का सबूत है कि इलाके के अधिकांशत कच्चे और पक्के तालाबों तक वन विभाग द्वारा करोड़ों के बजट खर्च होने के बावजूद भी नहीं पहुंच रहा जीव जंतुओं तक पानी, जिससे वह अपनी प्यास बुझा सकें इसका खास उदाहरण है कि सूखे पड़े तालाब और पानी की आप में प्यास से पीड़ित जीव जंतु असमय में काल के गाल में समा रहे है, जबकि वन विभाग पानी भरा होने का दावा कर रहा है लेकिन तालाबों में पिछवाड़ा धोने लायक तक का पानी नहीं है और पशु पक्षी प्यास से व्याकुल हो असमय काल कवलित होने को विवश है।

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